हेलो दोस्तों, काफी वक्त से मैंने कोई किताब का सारांश नहीं लिखा तोह मैंने सोचा क्योँ न आज एक किताब का सारांश लिखा जाए वैसे आज जिस पुष्तक की में बात करने वाला हु वह मैंने पिछले हफ्ते पढ़ के ख़तम कर दी है और अब में इसका सारांश आपको बताऊंगा.

तोह दोस्तों आज जिस पुष्तक की में बात करने वाला हु उसका नाम है The Laws of Human Nature by Robert Greene इस पुष्तक के अंदर ४८ ऐसे नियम बताये है जिस्से हमे Human Nature को समझने में काफी मदद मिलेगी. में आपको सारे के सारे नियम नहीं बताऊंगा लेकिन जो अहम नियम है उसी की चर्चा हम यहा करेंगे, क्योँकि सारे नियम बताने जाऊँगा तोह लेख बहुत लम्बा हो जायगा. तोह शुरू करते है The Laws of Human Nature Book Summary in Hindi. 

मैंने बहुत सी पुष्तको का सारांश लिखा है नीचे लिंक पर क्लिक कर के आप पढ सकते है.

Book Summary in Hindi

The Laws of Human Nature Book Summary in Hindi - By Robert Greene


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Law 13 - The Law of Aimlessness

इस नियम में हमे लेखक Martin Luther King Jr. का उदाहरण देते हुए बताते है की बचपन से ही Martin Luther King Jr. के पिता उनको एक गिरझाघार के मंत्री बनाने चाहते थे, लेकिन Martin Luther King Jr. दिमाग में कुछ और चल रहा था.

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Martin Luther King Jr. काफी संवेदनशील थे उन्हें अन्याय पसंद बिलकुल नहीं था, एक दिन उनके घर पर हमला हुआ अपने चमड़ी के रंग को लेकर अब इस्से उनको काफी चिंता होने लगी अपने भविष्य को लेकर क्योँकि उन्हें लगता था की उनके काले रंग की वजह से उनको समाज में जगह नहीं मिलेगी.

लकिन एक दिन उनको अंदर से आवाज़ आयी की तुम्हे इस अन्याय के खिलाफ लड़ना होगा, बस फिर क्या था Martin Luther King Jr. अपना यही Aim बना लिया की मुझे अन्याय के खिलाफ लड़ना है अपने Aim के साथ डटे रहने की वजह से चीज़े अपने आप ठीक होती गयी और देखते ही देखते  Martin Luther King Jr. बहुत ही प्रभावी नेता बन गए, वह America Civil Rights Moments के सब से प्रसिद्ध चेहरा बन गए और उनसे लाखो लोग प्रभावित हुए.

अब लेखक हमे यहा समझाने की यह कोशिश कर रहे है की जानवरो और इंसानो में सब से बड़ा फर्क यह होता है की जानवर अपने सहज ज्ञान से मार्गदर्शक लेते है जबकि इंसान अपने कार्रवाई और निर्णय को पसंद कर सकते है. लेकिन यहा दिक्कत तब होती है जब हमारे कार्य किसी बड़े लक्ष्य के लिए नहीं होते है और तब हम उलझन में पड जाते है और हर चीज़ हमे व्यर्थ लगने लगती है.

तोह हमारा एक लक्ष्य होना ज़रूरी है दोस्तों ताकि हम हमारी ज़िन्दगी को उसी की तरफ ले जाए और तभी हमारे लिए फैसले लेना काफी आसान हो जायगा क्योँकि हमे हमारा लक्ष्य पता है.

Law 14 - The Law of Conformity

मानव प्रकृति को समझने के लिए हमे सब से पहले मनोविज्ञान का विकास समझने की ज़रुरत है, क्रमागत उन्नति की वजह से हमारी सोच और व्यवहार कैसे बदलता रहा है.

उदाहरण के तौर पर पुराने ज़माने के लोग छोटे से गाँव में रहते थे तोह उस गाँव में जितने भी लोग रहते थे उनके लिए यह ज़रूरी होता था की वोह गाँव में जो समूह है उनके वह भाग बने रहे, मान लीजिए आपके गाँव में १०० लोग रहते है लेकिन वोह आपको पसंद नहीं करते तोह जाहिर सी बात है वह आपको गाँव में रहने ही नहीं देंगे इस लिए ज़रूरी है की जो गाँव का समूह है उसमें बने रहे ताकि कोई दिक्कत खड़ी न हो जाए और इसी को Conformity केहते है.

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लेकिन अभी आप यहाँ कहोगे की यह तोह पुराने ज़माने का उदाहरण था आज के नए ज़माने में तोह हम हमारे पडोसी को भी नहीं जानते लेकिन आपका मनोविज्ञान वही पुराने ज़माने का ही है क्योँकि हम समाज से अलग नहीं रहना चाहते, भले ही हम हमारे पडोसी को नहीं जानते लेकिन हम हमारे समाज के साथ जुड कर रहना चाहते है और यह एक मानव प्रवृत्ति है और यह मानव प्रवृत्ति इस लिए है क्योँकि अगर भविष्य में कुछ गलत होता है तोह हमारे अकेले के साथ गलत नहीं होगा वह पूरे समाज के साथ होगा.

Law 15 - The Law of Fickleness 

लेखक यहाँ कहते है की शायद ही कभी हम एक ही भावना महसूस करते है अक्सर हम एक साथ दो-तीन भावना को महसूस करते है इस लिए सामने वाला कैसा महसूस कर रहा है या उसके दिमाग में क्या चल रहा है यह कहना बहुत मुश्किल है और यह विभिन्न भावनाए बचपन से ही शुरू होते है.

उदाहरण के तौर पर बच्चे अपने मातापिता से काफी प्यार करते होते है लेकिन अगर मातापिता ने अपने बच्चो को डाटा तोह बच्चे को बुरा भी लगेगा, तोह एक ही साथ वोह बच्चा अपने मातपिता के लिए प्यार भी महसूस कर रहा है और उसे बुरा भी लग रहा है. और जब हम बड़े हो जाते है तोह हमारी भावनाए इसी तहरा काम करती है हम कुछ करने के लिए काफी उत्साहित होते है लेकिन जब वक़्त आता है तोह हम बेचैनी भी महसूस करते है.

Law 16 - The Law of Aggressiveness

अक्सर जब Aggressiveness शब्द आता है तोह हम ग़ुस्से के बारे में सोचते है लेकिन लेखक हमे यहा उदहारण देते है John D. Rockefeller का जो एक वक़्त America के सब से अमीर इंसान थे. John D. Rockefeller वैसे तोह एक गरीब गरीब घर से आते थे लेकिन उनके अंदर एक Aggression था कुछ करने का.

John D. Rockefeller ने जो भी व्यापार शुरू किया उस में अपना दृष्टिकोण एकदम Aggressive रक्खा. उन्होंने वह सब कुछ किया जो उनके प्रतियोगी को प्रतियोगिता से बहार कर दे और एक वक्त तोह ऐसा आ गया था की कोई भी उनके साथ प्रतिस्पर्धा में उतरना ही नहीं चाहता था ऐसा खौफ उन्होंने अपना जमा दिया था.

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John D. Rockefeller ग़ुस्सा बिलकुल भी नहीं आता था वोह बहुत ही शांत इंसान थे इस लिए वोह वोह सोच सकते थे जो एक गुस्सैल इंसान नहीं सोच सकता, हमे Aggressiveness को ग़ुस्से से जोडकर नही देखना चाहिए अगर ग़ुस्सा आता भी है तोह उस ग़ुस्से को पालो उसे हथ्यार बनाओ और उसका उपयोग करो ताकि वोह आपको कोई मूल्य प्रदान करे.

Law 17 - The Law of Generational Myopia 

आपने अक्सर अपने मा-बाप से यह सुना होगा की तुम लोगो की Generation बिगड़ गयी है या फिर तुम लोगो की Generation अलग है, यह इस लिए होता है क्योँकि उनकी Generation अलग थी इस लिए उनकी सोच अलग थी और वोह भी अपने मा-बाप की Generation से अलग थे.

जब भी कोई नयी Generation आती है वह अपनी Generation को पहले की Generation से अलग पाती है, और यह Generational thinking सब को प्रभावित करती है.

हमारे मां-बाप की जो Generation थी वह ज़्यादा Safety और Security पर ज़्यादा ज़ोर देती थी, हमारी जो Generation है वोह व्यवसायी और नवीनता पर ज़्यादा जोर देती है और जो आनेवाली Generation होगी उन पर Social Media का काफी प्रभाव होगा क्योँकि Social Media आज आम है बचपन से लोग अब Social Media से जुड जाते है जिस्से उनका दृष्टिकोण बदल जाता है.

तोह जब भी आप किसी को समझने की कोशिश करे तोह सब से पहले आपको यह जान्ना होगा की वह किस Generation से है और उसकी सोच कैसी है उसी हिसाब से आपको उनसे बात करनी होगी इस लिए आपको Generational Myopia से निकलना होगा और आपको सब के point of view से सोचना होगा 

Law 18 - The Law of Death Denial

यह मेरे हिसाब से सब से बेहतरीन Law है, देखिए सिर्फ इंसान को ही पता होता है की वोह मरने वाला है और यह सच्चाई है लेकिन ज़्यादातर लोग इस सच्चाई को भूल जाते है या फिर इसकी अनदेखी करते है क्योँकि जब हम मौत के बारे में सोचते है तोह हम अच्छा महसूस नहीं करते. लेखक यहां यह कहते है की पुराने ज़माने में भी लोग मौत से काफी डरते होंगे इसी लिए वह अलग अलग धर्म से जुड़े हुए थे. लेकिन आजकल के जो लोग है वह मौत का डर दिखाते नहीं है नाही उसकी बात करते है लेकिन अवचेतन मन में हमारे वह दर बैठा हुआ है.

लेखक का कहना यहां पर यह है की अगर हम इस सच्चाई का सामना करे और मान ले की भाई एक दिन तोह मर ही जाना है तोह हम ज़िन्दगी को और अच्छी से जी सकते है.

तोह दोस्तों यह थी The Laws of Human Nature Book Summary in Hindi. अगर आपको यह सारांश अच्छा लगा हो तोह अपने दोस्तों से ज़रूर शेयर करएगा।

धन्यवाद