हेलो दोस्तों, आज हम पढ़ेंगे मुहम्मद बिन तुगलक की जीवनी, यह गियासुद्दीन तुगलक का बेटा था और पिछले लेख में हमने गियासुद्दीन तुगलक की जीवनी को पढा उनके शासन को समझा अगर आपने वह लेख नहीं पढा तोह अभी जाके पढ सकते है.

गियासुद्दीन तुगलक की जीवनी

मुहम्मद बिन तुगलक वैसे तोह यह बहुत ही पढा-लिखा सुल्तान था लेकिन इसका शासन बुरी तरीके से असफल हुआ था कुछ ऐसे फैसले किये थे जिसे हम मूर्खता से ज़्यादा कुछ नहीं कह सकते, आगे हम सब पढेंगे की क्या क्या फैसले किये थे और इसका शासन कैसा था सब कुछ पढेंगे.

मुहम्मद बिन तुगलक जीवनी - Biography of Muhammad bin Tughlaq in Hindi


Early Life

मुहम्मद बिन तुगलक, गियासुद्दीन तुगलक का बेटा था और इसकी माँ एक हिन्दू थी मुहम्मद बिन तुगलक का दूसरा नाम था उलुघ खान लेकिन जब यह सुल्तान बना तब से इसका नाम पड गया मुहम्मद बिन तुगलक.

गियासुद्दीन तुगलक का जो शासन था वह १३२०-१३२५ तक रहा था, लेकिन मुहम्मद बिन तुगलक ने साजिश रच के अपने पिता को मार डाला और खुद सुल्तान बन गया और यह इब्न-अल-बतुत्ता ने लिखा है.

Become Sultan And Education 

अब जैसे ही गियासुद्दीन तुगलक मरा तोह ठीक ३ दिन बाद ही वह सुल्तान बन गया तुगलक वंश का. मुहम्मद बिन तुगलक काफी पढा-लिखा था इसे हर विषय के बारे में अच्छा खासा ज्ञान था, गणित, खगोल, दर्शन, और धर्म इन सब विषयो के बारे में इसे काफी अच्छी जानकारी थी.

यह काफी अच्छा कमांडर भी था और काफी उदार भी था जो कोई भी इसके पास फरयाद लेकर आता था उसकी फरयाद वह दूर कर देता था, अपने आप को वह शराब से दूर रखता था और रोज़ खुदा की इबादत करता था.

अब इतना पढ़े-लिखे होने के बावजूद वोह स्थिति का विश्लेषण करने में नाकामयाब रहा था, कुछ ऐसे फैसले किये जिसके वजह से उसकी खुद की जन्ता ने उसे पागल कहा, तोह हम इसके ६ फैसलों की चर्चा यहा करेंगे जो सब से ज़्यादा महत्वपूर्ण थे.

Domestic Reforms 

Revenue Policy

आय नीति की बात करे तोह सब से बडा काम इसने किया था भूमि सुधार का, इसने एक अध्यादेश उत्तीर्ण करवाया जिस में यह था की जितनी भी भूमि है उनको अभिलेख किया जाए की कितनी बडी भूमि है और उस्से कितनी आय आ सकती है उसको पंजीकृत किया जाए. अब यह फैसला तोह सही था लेकिन फिर इस पर जो कर लगाए गए वह सब गलत फैसला था.

Taxation Policy

तोह १९२५ में यह सुल्तान बना और सुल्तान बन्ने के बाद पहला काम इसने आय को लेकर नई नीतिया बनाई अब लोगो को इस्से काफी उम्मीदे थी क्योँकि बहुत ही पढा-लिखा था और लोगो को लग रहा था की अब हिन्दुस्थान का अच्छा वक़्त शुरू होगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

तोह इसने क्या किया की इसने कर बढा दिए करीबन २० से ३०% तक इसने कर बढा दिए अल्लाउद्दीन खिलजी ने भी अपने वक़्त में ५०% जितना कर बढा दिया था लेकिन जब गियासुद्दीन तुगलक आया तोह उसने कम कर दिए लेकिन फिर इसके बेटे ने फिर से बढा दिए.

गंगा-जमुना का क्षेत्र जो है जो के इलहाबाद में इनका संगम होता है तोह यह जो क्षेत्र हे वह बहुत ही उपजाऊ क्षेत्र है तोह मुहम्मद बिन तुगलक ने क्या किया की यहा पर कर बढा दिया जिसके वजह से किसान काफी परेसान हो गए.

लोग इसकी कर नीति से खुश नहीं थे जो भी अफसर कर वसूल करने आते थे और अगर कोई कर नहीं दे पाता था तोह अफसर उसको मारना शुरू कर देते थे, काफी लोगो ने मुहम्मद बिन तुगलक को पत्र लिखे की कर नीति को बदलो और फिर काफी लोग बागी बन गए और डकैत के गुट में शामिल होने लग गए और फिर बाद में जाकर मुहम्मद बिन तुगलक को समज आया की उसने कितनी बडी गलती कर दी है.

मुहम्मद बिन तुगलक ने फिर पूरा पुनर्स्थापित करने की कोशिश की, कर को कम किये, जो ज़्यादा वसूल किया तोह वह वापस भी दिया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और लोगो के मन में मुहम्मद बिन तुगलक को लेकर छबि बन गयी थी की यह पागल है, क्योँकि पहले कर बढाता है फिर खुद ही लोगो को दे देता है तोह कही न कही लोगो का विश्वास डगमगा रहा था.

Diwan-I-Kohi

यह एक योजना थी जिसके लिए अलग से कृषि विभाग बनाया गया था इस योजना में यह था की जो भी बीहड़ जमीन थी जहा पर खेती नहीं हो सकती थी वहा पर फसल उघाना, अब इसके लिए इसने किसानो को बुलाया और कहा की जितने भी बीहड़ जमीन है उसमें आप खेती करेंगे, फसल का चक्रिकरण करेंगे जिस तरीके की जमीन होगी उस तरीके की आप फसल उगायेंगे.

लेकिन यह योजना बुरी तरीके से असफल हुई इसके दो मुख्य कारण थे. देखिये खेती हमेशा वही होगी जहा ज़मीन उपजाव होगी तोह ज्यादातर ज़मीने जो इस योजना के तहत चुनी गयी थी वह उपजाव थी ही नहीं.

दूसरा कारण था जिन अफसरों को उसने तैनात किया था इस योजना के लिए उनको खेती का कोई अनुभव नहीं था वोह लोगो को मार्गदर्शक देने की कोशिश पूरी कर रहे थे लेकिन वोह मार्गदर्शक लोगो को ठीक से न दे पाए. फिर भ्रष्टाचार भी काफी था क्योँकि खेती का मामला था.

Transfer Of The Capital 

अब इसमें क्या हुआ था की देवगिरि को अल्लाउदीन खिलजी ने पूरी तरीके से जीत लिया था फिर बाद में पूरी तरीके से दक्षिण में तुगलक ने अपनी पकड जमा ली थी तोह पूरी तरीके से तुगलक का दबदबा था दक्षिण में.

अब मुहम्मद बिन तुगलक को ढेर सारे आलोचना से भरे पत्र रोज़ मिलते थे जिसके वजह से वह दिल्ली छोड कर जाना चाहता था, तोह मुहम्मद बिन तुगलक ने सोचा की क्योँ न में पूरी राजधानी को ही किसी और जगह ले जाऊ.

तोह इसने दिल्ली से देवगिरि का सफर किया जो की करीबन १५०० किलोमीटर होता है और अकेले नहीं दिल्ली की पूरी जन्ता को लेकर हर एक शक़्स को वोह लेकर गया दिल्ली से देवगिरि.

लेकिन यह सब इसने किया क्योँ? और देवगिरि को ही क्योँ चुना? देखिये देवगिरि मध्य में है तोह शासन का प्रबंध करना काफी आसान हो जायगा, जब यह दिल्ली में था तोह दक्षिण को और मध्य के जो दूसरे क्षेत्र है उसको ठीक से काबू नहीं कर पाता था, तोह अगर देवगिरि जाता है तोह काफी अच्छे से वह काबू कर सकता है.

दूसरा उत्तर पूर्व सीमांत से मंगोलो का बार बार छापा मारना चालु था तोह उस्से हम बच जाएंगे तोह एक यह भी कारण था राजधानी को दूसरी जगह ले जाना.

तीसरा दक्षिण काफी धनी राज्य था तोह यहाँ से धन कमाना काफी आसान था और चौथा कारण था जो मैंने पहले ही बताया की लोग इसकी आलोचना काफी करते थे, तोह यह सारे कारणों की वजह से उसने फैसला किया की हम अपनी राजधानी देवगिरि ले जाएंगे.

अब जब देवगिरि पोहचे तोह आधे लोग तोह मर चुके थे, लेकिन जितने भी लोग पोहचे वोह वहा कुछ साल तक ही रह पाए क्योँकि उनको कुछ वहा समज ही नहीं आता था और देवगिरि उनको पसंद भी नहीं था तोह यह फरयाद मुहम्मद बिन तुगलक तक पोहची अब इसे भी दिक्कत थी देवगिरि से क्योँकि अब वोह दक्षिण में रह कर उत्तर को काबू नहीं कर पा रहा था, तोह मुहम्मद बिन तुगलक ने फैसला किया की हम वापस दिल्ली चलेंगे.

Introduction of Token Currency - १३२९-३०

उस वक़्त चांदी, पित्तल, टंका यह सब चलते थे और यह उस वक़्त की मुद्रा थी, अब चांदी, सोना इन सब के लिए आपको चाहिए धातु अब धातु की कमी हो गयी थी उस वक़्त, तोह मुहम्मद बिन तुगलक ने क्या किया की टोकन मुद्रा का आरंभ किया.

अब यह टोकन मुद्रा क्या था, दरअसल मुहम्मद बिन तुगलक ने क्या किया की जो पीतल का सिक्का था उसको चांदी के सिक्के की बराबरी दे दी, अब इस्से क्या हुआ की लोगो ने जाली मुद्रा बनाना शुरू कर दी, देखिये आप किसी छोटी चीज़ को बड़ी चीज़ के बराबर नहीं रख सकते. हर एक लोग पीतल की मुद्रा को छापने लगा और उसको चांदी बना देते थे.

तोह इस वजह से काफी भ्र्ष्टाचार बढा, और ढेर सारे पीतल के सिक्के बन्ने लगे और उसको एक चांदी के रूप में दिखाया जाता था जिसके वजह से अवमूल्यन बढ गया. तोह यह फैसला भी बहुत बडा असफल साबित हुआ.

Khurasan Expedition

यह अपने शासन को जगह जगह फैलाना चाहता था सिर्फ भारत में ही नहीं, भारत के बहार भी शासन स्थापित करना चाहता था, तोह इसने इराक पर अपना अभियान चलाया, इस अभियान से पहले सब अपना योगदान देने के लिए राजी थे जैसे के फारस उसने आश्वासन दिया था की वह इस अभियान में मदद ज़रूर करेंगे लेकिन अभियान शुरू होने से पहले ही उन्होंने अपने हाथ वापस खींच लिए, तोह यह भी एक असफल फैसला था मुहम्मद बिन तुगलक का.

मंगोलो के छापे से भी यह बहुत डर गया था और इतना डर गया था की इसने मंगोलो को पैसे देने शुरू कर दिए ताकि वह आक्रमण न करे. तोह यह कुछ फैसले थे जो असफल रहे थे हलाकि मंशा सही थी लेकिन उनको लागू ठीक से नहीं करवाया गया था 

Death

१३५१ में एक अभियान के दौरान इसकी मौत हो गयी, और फिर इसके बाद आया फिरोज शाह तुगलक. अब इनकी जीवनी हम अगले लेख में पढ़ेंगे, आशा करता हु आपको मुहम्मद बिन तुगलक जीवनी पसंद आयी होगी, पसंद आयी हो तोह अपने दोस्तों से ज़रूर शेयर करे और मेरी वेबसाइट को सब्सक्राइब ज़रूर कर ले ताकि में जो भी लेख डालू उसकी सुचना आपको मिल जाए.

धन्यवाद