हेलो दोस्तों आज आप पढोगे फिरोज शाह तुगलक की जीवनी यह तुगलक वंश के आखरी सुल्तान था. इस्से पहले गियासुद्दीन तुगलक और मुहम्मद बिन तुगलक की जीवनी मैंने लिखी है आप जाके पढ सकते है.

फिरोज शाह तुगलक जीवनी - Biography of Firuz Shah Tughlaq in Hindi


गियासुद्दीन तुगलक और मुहम्मद बिन तुगलक जीवनी

Early Life

फिरोज शाह तुगलक, मुहमद बिन तुगलक का चचेरा भाई था मतलब गियासुद्दीन तुगलक के छोटे भाई रज़्ज़ाक़ का बेटा था. इसका जन्म हुआ था १३०२ में, और इसने गद्दी को छीना नहीं था बल्कि इसे गद्दी सामने से दी गयी थी राजदरबारियों द्वारा, जब मुहम्मद बिन तुगलक की मौत हो गयी तोह अगला सुल्तान फिरोज शाह तुगलक को चुना गया और इस तहरा यह १३५१ में सुल्तान बना.

Revenue Reforms

भूमि सुधार की ज़रुरत उस वक़्त बहुत थी, क्योँकि अगर हम देखे तोह सरकार को आय कर द्वारा मिलती है तभी जाके एक देश चल सकता है तोह उस वक़्त ज़मीने दे दी जाती थी किसानो को या फिर बड़े बड़े जो ज़मीन के मालिक होते थे उनको फिर वह किसानो को भर्ती करते थे और उनसे खेती करवाते थे तोह वहा से उत्पादन होता था तोह उत्पादन का १/१० या फिर १/११ इस तहरा से कर देना होता था सरकार को.

अब अल्लाउद्दीन खिलजी ने अपने वक़्त में ५०% तक कर बढ़ा दिया था फिर मुहम्मद बिन तुग़लक़ ने भी यही किया था लेकिन मुहम्मद बिन तुग़लक़ एक नीति लेकर आया था जहा पर वह बीहड़ ज़मीनो पर खेती करवाना चाहता था लेकिन यह सफल नहीं हुआ क्योँकि ज़्यादातर ज़मीने उपजाव नहीं थी, तोह अब फिरोज शाह तुगलक ने क्या किया था की इसने कर को तय कर दिया था की इतना तोह आपको देना ही पड़ेगा.

फिरोज शाह तुगलक ने एक अधिकारी नियुक्त किया जिसका नाम था ख्वाजा हिसन-उद-दिन और आकलन तैयार किया की इतना कर तोह लोगो को देना ही होगा सरकार को. 

उस वक़्त दो तरीके की ज़मीने थी एक खालसा ज़मीन यह सरकारी ज़मीन थी और एक और ज़मीन जो लोगो के पास थी और इन ज़मीनो की आय साडे ६ करोड़ टंकास (चांदी के सिक्के) इतना तय किया गया था तोह कुल मिलकर देखा जाए तोह यह फैसला तोह सही था लेकिन उत्पादन तोह इतना हो नहीं रहा था तोह लोग कहा से देंगे, या फिर लोग ज़मीने कहा से खरीदेंगे.

Taxation Reforms

  • खराज कर - इस में ज़मीन से जितना भी उत्पादन होता था उसका १/१० देना पड़ता था सरकार को.
  • जकात कर - यह धार्मिक उद्देश्य से अमीर मुसलमानो से लिया जाता था और २.५% होता था.
  • खाम कर - इसमें जहा भी छापा मारा जाता था या फिर किसी भी राज्य पर कब्ज़ा किया जाता था तोह वहा से लूटा गया हुआ धन को बाट दिया जाता था, १/५ जो है सरकार रख लेती थी और ४/५ सैनिको को दे दिया जाता था. मतलब सैनिको को करीबन ८०% दिया जाता था जो की बहुत ही अच्छी बात थी.
  • जजिया कर - यह कर उनपर था जो मुस्लिम नहीं थे अगर आपको हिन्दुस्थान में रहना है तोह आपको जजिया देना पड़ेगा लेकिन यह औरतो और बच्चो से नहीं लिया जाता था.

Irrigation Policy

फिरोज शाह तुगलक ने बहुत सारी नेहरे बनवाई थी इसने ४ सब से बड़ी नेहरे बनवाई थी इसने नदियो को जोड दिया था जिससे नेहरो में पानी आता था और इसके बाद इसकी आपूर्ति की जाती थी. इस पर भी कर था जितना आप पानी का इश्तेमाल करोगे उतना आपको कर देना पड़ेगा.

खिलजी वंश जीवनी

  • तोह अगर सब से लम्बी नहर की बात करे जो जमुना नदी को जोड़ती थी हिसार से और यह १५० मील लम्बी थी.
  • फिर सतलज से लेकर घागरा तक यह १०० मील लम्बी थी.
  • मांडवी और सिरमूर से लेकर हांसी तक यह भी काफी काम्बी थी.
  • और चौथी घागरा से लेकर फ़िरोज़ाबाद तक.

More Notable Works

  • दीवान-इ-खेरत - इसमें क्या होता था की जो भी गरीब परिवार के लोग थे और जो अपनी बेटियों की शादी करवाना चाहते थे तोह उनके पास पैसे नहीं होते थे, तोह दीवान-इ-खेरत पैसा देता था शादी के लिए और गरीबो को भी पैसे दिया जाता था.
  • दारू-उल-शिफा - यह अस्पताल थे और यह गरीबो का इलाज करते थे मुफ्त में और इतना ही नहीं दवाई तक मुफ्त में दी जाती थी.
  • सराई - यह होटल थे जो भी पर्यटक घूमने आता था या फिर स्थानांतरगमन भी होता था, सैनिको को भी एक सेहर से दूसरे सेहर में उनकी बदली होती थी तोह यह सब देखर काफी सारे होटल बनवा दिए गए ताकि लोग आराम से रह सके.
  • अनुदान - जिस जिस ने भी तक़लीफ़े सहन की है युद्ध के दौरान या फिर जिस किसी ने भी अपने परिवार वालो को खो दिया है युद्ध में या फिर स्थानांतर में उनको मुआवजा दिया जाता था सरकार की तरफ से.

चार महत्वपूर्ण सेहर इसने जो है ढूंढे थे फिरोजाबाद, फतेहाबाद, जौनपुर और हिसार और इसने ३० शैक्षिक संस्थान भी बनवाये थे और ३ कॉलेज भी बनवाये थे. इनसे अपनी ही जीवनी लिखी है फतहुआत-ई-फिरोजशाह.

As A Commander

अब कहा जाता है की यह अच्छा सेनापति नहीं था, इसने अपने शासन में ४ महत्वपूर्ण अभियान चलाये लेकिन इतने सफल नहीं हुए, अब अक्सर क्या होता था की जब भी कोई सुल्तान मर जाता था तोह जिस भी राज्य पर उस सुल्तान ने अपना कब्ज़ा जमाया होता था वह राज्य अपने आप को आज़ाद घोषित कर देता था, मुहम्मद बिन तुग़लक़ जैसे ही मरा बंगाल ने अपने आपको आज़ाद घोषित कर दिया.

तोह अब बंगाल पर जीत हासिल करने के उसने १३५३ में बंगाल पर अभियान चलाया लेकिन असफल हुआ, लेकिन जब वह वापस आ रहा था तब उसने कट्टक पर अभियान चलाकर कट्टक को जीत लिया. इसके बाद इसने फिर से १३५८ में बंगाल पर अभियान चलाया लेकिन फिर असफल हो गया.

फिर कांगरा फोर्ट, नागरकोट और ठट्टा जैसे सेहरो को जीत लिया था लेकिन फिर भी इसे बहुत बडा विस्तारवादी कहा नहीं जाता. क्योँकि ज़्यादरतर इसके अभियान असफल हुए थे, लेकिन इसके असफल होने का कारन भी था की इसने स्थायी सेना नहीं रक्खी थी, दूसरा जो लायक था सैनिक बन्ने के लिए उसे सेना में भर्ती नहीं किया जाता था मतलब इसके राज्य में ज़्यादातर सैनिक सिफारिश से भर्ती हुए थे.

Religion

यह बहुत ही धार्मिक था, और धार्मिक उपदेश को यह पूरी तरीके से अपनाता था, और जो भी सुल्तान के फैसले होते थे उन में उलेमा का हाथ ज़रूर होता था.

Death

आखर के दिन इसके दुःख में ही बीते, इसके दो बेटे मर गए होते है अभियान के दौरान और इसके तीसरे बेटे मुहम्मद खान को यह गद्दी दे देता है, तब फिरोज शाह तुगलक ८० साल का होता है और बोला जाता है की यह पूरी तरीके से अपना मानसिक संतुलन खो बैठा था और १३८८ में इसकी मृत्यु हो जाती है.

तोह दोस्तों यह थी फिरोज शाह तुगलक की जीवनी, आशा करता हु आपको पसंद आयी होगी, पसंद आयी हो तोह अपने दोस्तों से ज़रूर शेयर करना और मेरे ब्लॉग को सब्सक्राइब कर लीजिए ताकि में जो भी लेख दालु उसकी सुचना आपको मिल जाए.

धन्यवाद।