दोसतो आज हम बात करेंगे नीम करोली बाबा की. दोस्तों इनको चमत्कारी बाबा भी कहा जाता है, इनके दुनियाभर में भक्त है और पता नहीं कहा कहा से लोग इनके आश्रम में आते है और जब यह ज़िंदा थे तब लोग इनसे मिलने भी आते थे अपनी परेशानी और मुस्किलो का हल निकलने के लिए.

काफी महान महान हस्तिया इनके पास आ चुके है दीक्षा लेने के लिए आगे हम पढ़ेंगे कौन कौन सी वह हस्तिया थी, तोह दोस्तों आज पढ़ेंगे नीम करोली बाबा की जीवनी.


नीम करोली बाबा जीवनी - Biography of Neem Karoli Baba in Hindi


Early Life Neem Karoli Baba

इनका जन्म हुआ था १९०० में अकबरपुर गाँव, फ़िरोज़ाबाद डिस्ट्रिक्ट, उत्तर प्रदेश एक ब्राह्मण परिवार में. इनके बचपन का नाम था लक्ष्मण दास शर्मा इनके पिता दुर्गा प्रसाद शर्मा ज़मींदार थे तोह परिवार समृद्ध था.

अब दोस्तों बचपन से ही नीम करोली बाबा में एक आकर्षण छुपा हुआ था जो लोगो को उनके और खीचता था आप यकीन नहीं करेंगे जब यह छोटे थे तभी से लोग इनके दर्शन के लिए आते थे.

सिर्फ ११ साल की उम्र में इन्होने अपना घर छोड दिया और इधर उधर भटकते रहते थे, फिर यह गए गुजरात और ऐसा कहा जाता है की करीबन ७-८ साल उन्होंने वहा तपस्या की और ८ सिद्धिया हासिल की अगर किसी भी साधु की सिद्धि हासिल हो गयी तोह वह ब्रह्मांड से जुड जाता है और आपने जितने भी साधू को देखा होगा वह ध्यान में लगे रहते है तोह सिद्धि पाना बहुत मुश्किल होता है और नीम करोली बाबा के पास ८ सिद्धिया थी.

अब आप में से कई लोगो को यह सवाल ज़रूर होगा की इनका नाम नीम करोली बाबा कैसे पडा? तोह इसकी भी एक कहानी है.

Neem Karoli Baba Ki Kahani

तोह नीम करोली बाबा का नाम नीम करोली कैसे पड़ा? फरुखाबाद के पास एक गाँव है नीब करोरी तोह एक दिन यह ट्रैन से जा रहे थे और गलती से फर्स्ट क्लास डिब्बे में चढ गए अब TT आया टिकट देखने के लिए TT ने कहा की टिकट दिखाओ नीम करोली बाबा ने कह दिया टिकट नही है तोह TT ने कहा टिकट नही है तोह उतर जाओ ट्रैन से, तोह नीम करोली बाबा को ट्रैन से उतार दिया गया.

तोह नीम करोली बाबा ट्रैन से उतर तोह गए लेकिन जैसे उतरे ट्रैन चालु ही नहीं हुई. तब ट्रैन का ड्राइवर और TT को एहसास हुआ की उन्होंने कितनी बड़ी गलती कर दी है,  नीम करोली बाबा वही पे ही बैठे थे और ड्राइवर ने आके हाथ जोड कर नीम करोली बाबा से कहा की आप ट्रैन में आके बैठ जाइये ताकि हमारी ट्रैन चालु हो जाए.

नीम करोली बाबा वापस ट्रैन में बैठने से मान तोह गए लेकिन उन्होंने दो शर्ते रक्खी. पहेली शर्त थी की आप साधुओ के साथ अच्छा व्यवाहर करेंगे और दूसरा आप यही पर एक स्टेशन बनवा दिज्ये, तोह दोनों शर्ते मान ली गयी फिर उसके बाद नीम करोली बाबा ट्रैन में चढे तोह ट्रैन भी चल पडी, तोह वही से इनका नाम नीम करोली बाबा पड गया.

Neem Karoli Baba Ashram

दोस्तों इनके वैसे तोह कई आश्रम भी है और कैंची धाम आश्रम सब से प्रसिद्ध आश्रम है. नीम करोली बाबा की बात की जाए की वह बाबा बन्ने के बाद कहा रहते थे तोह दोस्तों यह मंदिर में रहते थे चबूतरे में और कभी कभी पैड के निचे सो जाते थे.

और अपने जीवन में इन्होने दो बडे आश्रम को बनाया एक वृंदावन में और एक जो मैंने ऊपर बताया कैंची धाम में और कैंची धाम में ही मार्क ज़ुकेरबर्ग गए थे और सोचा था की एक दिन कैंची धाम में बितायेंगे लेकिन दो दिन वहा पे रुक गए. 

और नीम करोली बाबा ने अपने जीवन में दो मंदिर भी बनाये देखिये नीम करोली बाबा को हनुमान नीम करोली बाबा भी कहा जाता है मतलब हनुमान का अवतार तोह १९६४ में हनुमान मंदिर इन्होने खुद बनाया.

गूगल के संस्थापक Larry Page भी इनके आश्रम गए थे फिर Jaffery Skoll जो के Ebay के संस्थापक है वह भी इनके आश्रम गए थे और वह रुके थे 

Neem Karoli Baba Miracles

अब इनके चमत्कार और इनके शिष्यो की बात कर लेते है, तोह सब से बडे शिष्य थे राम दास लेकिन यह राम दास थे कौन? देखिये अगर इनके शिष्यो की बात करे तोह ज़्यादातर पश्चिमी देशों के लोग इनके शिष्य रहे है और इसी लिए विदेशो में इनके आश्रम भी कई है, तोह यह राम दास भी एक पश्चिमी देश की ही थे और इनका असली नाम था रिचर्ड अल्फेर्ड और यह अमेरिकन थे और हार्वर्ड विश्वविद्यालय में पढाते थे.

तोह एक दिन रिचर्ड अल्फेर्ड भारत आये थे घूम रहे थे हिमालय घूम रहे थे और वहा पर इनको पता चला की एक बहुत ही चमत्कारी बाबा है नीम करोली बाबा तोह उनके पास चले गए और ऐसे ही मिलने गए थे और वह आश्रम में एक दिन के लिए रुक गए अब रात को क्या हुआ की रिचर्ड अल्फेर्ड आसमान में तारो को देख रहे थे और काफी उदास थे फिर वहा पर नीम करोली बाबा आये और कहा बेटा मुझे पता है तुम उदास क्योँ हो तुम तारो में अपनी माँ को देख रहे हो और मुझे पता है तुम्हारी माँ का देहांत कैंसर से हुआ था.

रिचर्ड अल्फेर्ड ने जब यह बात सुनी तोह आत्मसमर्पण कर दिया क्योँकि नीम करोली बाबा को कैसे पता की मेरी माँ कैंसर से मरी थी और में तारो को देखकर अपनी माँ के बारे मैं सोच रहा हु और उसके बाद से रिचर्ड अल्फेर्ड हो गए राम दास. और यह राम दास से जुडी एक और कहानी है क्योँकि राम दास रसायनज्ञ थे तोह अपने साथ कुछ दवाई लाये थे तोह राम दस ने नीम करोली बाबा से कहा की अगर यह दवाई कोई एक साथ ३-४ बार खा ले तोह वह वही पर मर जायगा तोह नीम करोली बाबा ने फौरन ४-५ गोलिया खा ली एक साथ और कुछ भी नहीं हुआ और राम दास हक्के बक्के हो गए.

Steve Jobs Meet Neem Karoli Baba

स्टीव जॉब्स आये थे भारत में, वैसे तोह मैंने स्टीव जॉब्स की जीवनी लिखी है उस में मैंने विस्तार से बताया है की स्टीव जॉब्स कैसे भारत आये और कैसे वह नीम करोली बाबा से मिलना चाहते थे तोह आप स्टीव जॉब्स की जीवनी में भी पढ़ सकते है.

स्टीव जॉब्स जीवनी - Biography of Steve Jobs

तोह स्टीव जॉब्स आये थे १९७४ में और नीम करोली बाबा के बारे में उन्होंने सुना लेकिन नीम करोली बाबा का देहांत १९७३ में हो गया था तोह मिल तोह नहीं पाए लेकिन उनके आश्रम में वह कुछ दिनों तक रुके और जब वह वापस अमेरिका गए तोह पूरी तरीके से बदल चुके थे और यह खुद स्टीव जॉब्स बताते है और उसके बाद हम देखते है की Apple की स्थापना की और आज Apple बहुत बड़ी कंपनी है, और यही बात स्टीव जॉब्स ने मार्क ज़ुकेरबर्ग को भी बताई तोह जब मार्क ज़ुकेरबर्ग भारत आये थे तोह उन्होंने नीम करोली बाबा के आश्रम में दो दिन रुके थे.

एक और कहानी है एक SP की कहानी है राम नारायण की उनका प्रमोशन होने वाला था SP के लिए लेकिन फिर उन्हें पता चलता है की प्रमोशन नहीं होगा तोह वह नीम करोली बाबा के पास गए और सब कुछ बताया तोह नीम करोली बाबा ने कहा तुम परेशान मत हो आज ही तुम्हारा प्रमोशन हो जायगा और उसी दिन प्रमोशन हो जाता है.

ऐसे बहुत सी कहानिया है बहुत से चमत्कार है.

Baba Neem Karoli Maharaj

नीम करोली बाबा ज़्यादा नहीं बोलते थे बहुत ही कम बोलते थे वह अपनी आँखों से ही बात को बता देते थे और भक्त समज जाता था, और एकदम साधारण तरीके से रहते थे इनका पहनावा भी एकदम साधरण एक कम्बल लपेट के बैठे रहते थे, कही पर भी बैठ जाना और कही पर भी प्रवचन शुरू कर देना.

आज भी इनके आश्रम में बहुत सारे विदेशी लोग आते है वहा पर रुकते है और अमेरीका में तोह इनकी शिक्षाओं को सिखाया जाता है.

१९७३ में ११ सितम्बर १ बजे के १५ मिनिट पर इनका देहांत हो गया डॉक्टर ने बचाने के कोशिश बहुत की लेकिन नहीं बचा पाए और इनका देहांत हो गया.

तोह दोस्तों यह थी नीम करोली बाबा की जीवनी, आशा करता हु की आपको पसंद आयी होगी जीवनी अगर पसंद आयी है तोह अपने दोस्तों के साथ शेयर करे और मेरी वेबसाइट को सब्सक्राइब कर लीजिए ताकि में जो भी लेख दालु उसकी सुचना आपको मिल जाए.