आज हम बात करेंगे तुगलक वंश के संस्थापक गियासुद्दीन तुगलक की। इस्से पहले मैने गुलाम वंश पर ८ लेख और खिलजी सल्तनत पर ३ लेख लिख चूका हु और इस्लामिक सासको की श्रुंखला में हमने आखरी लेख पढा था मुबारक खिलजी का तोह सारी जीवनी उपलब्ध है आप जाके पढ सकते है.

गुलाम वंश के सासको की जीवनी

खिलजी सल्तनत के सासको की जीवनी

तोह शुरू करते है गियासुद्दीन तुगलक जीवनी.


गियासुद्दीन तुगलक जीवनी - Biography of Ghiyasuddin Tughlaq in Hindi


Tughlaq

दोस्तों अगर आपने खिलजी वंश की स्थापक जलालुद्दीन खिलजी की जीवनी पढ़ी हो तोह आपने पढा होगा की १२९० में खिलजी सल्तनत को इन्होने स्थापित किया था. अब यह काफी दयालु राजा था जो अल्लाउदीन खिलजी को पसंद नहीं था और इस वजह से अल्लाउदीन खिलजी ने जलालुद्दीन खिलजी को मार दिया। तोह १२९६ से अल्लाउदीन खिलजी का शासन शुरू हुआ और अल्लाउदीन खिलजी बडा ही चतुर राजा था काफी सारी नई नीतिया और कानून बनाये इसने जिसकी वजह से खिलजी वंश काफी फला-फूला।

१३१६ में अल्लाउदीन खिलजी को मलिक काफुर ने मार दिया और इसके बाद आया मुबारक खिलजी इसका शासन रहा १३१६-१३२० तक और यह ४ साल खिलजी वंश के लिए काल थे आप सब पढ सकते है मैंने मुबारक खिलजी पर लेख लिखा ही है.

मुबारक खिलजी की जीवनी

१३२० में खुसरो खान ने मुबारक खिलजी को मार दिया गद्दी के लिए लेकिन खुसरो खान का शासन चल ही नहीं पाया क्योँकि गाज़ी मालिक जो की गियासुद्दीन तुगलक का ही नाम था तोह गियासुद्दीन तुगलक ने खुसरो खान के खिलाफ युद्ध किया और खुसरो खान को हरा दिया।

Early Life 

इनके प्रारंभिक जीवन के बारे में इतने सूत्र नहीं है लेकिन अल्लाउद्दीन खिलजी के समय में मंगोल आक्रमण बहुत होता था तोह गियासुद्दीन तुगलक जो था काफी अच्छा प्रदर्शन करता था अपनी वीरता का, और काफी अच्छा सैनिक था और इसी से खुश होकर अल्लाउद्दीन खिलजी ने गियासुद्दीन तुगलक को मुल्तान का राज्य्पाल बना दिया गया तोह ताकत थी गियासुद्दीन तुगलक के पास के वोह तख्ता पलट कर सके.

लेकिन तख्ता पलट करने से पहले युद्ध से पहले गियासुद्दीन तुगलक ने बहुत सारे पत्र लिखे थे जितने भी पाकिस्तान के क्षेत्र के राज्य्पाल थे उस वक़्त और उन पत्रो में उन्होंने लिखा था की हम जो है मुबारक खिलजी से युद्ध करने जा रहे है इस में हमारी मदद करे, तोह उन लोगो ने मदद की क्योँकि वोह लोग भी चाहते थे की मुबारक खिलजी का शासन ख़तम हो, तोह फिर बाद में युद्ध हुआ और फिर गाज़ी मलिक जो बाद में गियासुद्दीन तुगलक से जाने गए अगले सुल्तान बने और १३२० से शुरू हुआ तुगलक वंश.

Sultan

अब हर सुल्तान की तहरा इनका शासन भी आसान नहीं होने वाला था क्योँकि जैसे मैंने अपने हर एक लेख में कहा है की राजदरबारी जो थे उनकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रहती थी वह सुल्तानों तक को उनकी गद्दी से हटा देते थे उनको मरवा देते थे.

दूसरा मुबारक खिलजी ने जो कबाडा कर के गया था अब वह सब ठीक करना था तोह अब गियासुद्दीन तुगलक के सामने दो सब से बड़ी चुनौती थी की राजदरबारियों को कैसे खुश किया जाए ताकि वह विद्रोह न करे और दूसरा अर्थव्यस्था को ठीक करना और गियासुद्दीन तुगलक इन सब में सफल भी हुआ. गियासुद्दीन तुगलक ने सब से पहले कूटनीति से काम लिया फिर जहा जहा विद्रोह हो रहा था वह पर अपनी सेना भेजी और उन सब को कुचल दिया।

Administration

गियासुद्दीन तुगलक बडा ही चालाक सुल्तान था उसे पता था की अगर में तानाशाह बन गया तोह मेरे लिए ही मुस्किले खडी हो जायगी तोह न ज़्यादा क्रूर बन्ना है न ही ज़्यादा किसी को छूट देनी है इसने बीच का रास्ता निकाला।

हिन्दू राजा जितने थे वोह गरीब हो गए थे खिलजी के राज में तोह गियासुद्दीन तुगलक ने यहा इनको धन दिया और इनको धन कमाने का मौका भी दिया लेकिन इस चीज का भी ख्याल रक्खा की बहुत ज़्यादा इनके पास धन न हो जाए वरना यह विद्रोह कर देंगे तोह बडे ही कूटनीति तरीके से गियासुद्दीन तुगलक ने हिन्दू राजाओ को अपने पक्ष में कर लिया।

फिर कृषि निति का प्रारंभ किया और अर्थव्यवस्ता को भी सुधारा, नहर प्रणाली का आरंभ गियासुद्दीन तुगलक ने ही किया था नेहरो को खेतो से जोड़ा गया वह से पानी की आपूर्ति होती थी तोह इस्से बहुत अच्छी खेती होती थी.

जो कर लिया जाता था कृर्षि से उसको भी ठीक किया गया १/५ और १/३ देना पडता था जो भी उत्पादन होता था और १/११ और १/१० एक साल में इससे ज़्यादा कोई नहीं लेगा, तोह यह जो नीतिया थी काफी उदार थी और इस वजह से किसानो का भरोसा गियासुद्दीन तुगलक ने जीत लिया।

राजदरबारियों का भरोसा भी जीता, अल्लाउद्दीन खिलजी ने क्या किया था अल्लाउद्दीन खिलजी उन सब राजदरबारियों को मरवा दिया था जिस जिस ने भी उसका साथ दिया था सुल्तान बन्ने में क्योँकि उसे लगा की अगर यह मुझे सुल्तान बना सकते है तोह कल को यह मुझे भी धोखा दे सकते है, गियासुद्दीन तुगलक ने इसका उल्टा किया गियासुद्दीन तुगलक ने सबको इनाम दिया जिसने भी उसका साथ दिया सुल्तान बनने में.

संचार को गियासुद्दीन तुगलक ने भडावा दिया फिर जो रोड थे उनको ठीक करवाए फिर पुल बनवाये, नेहरे बनवायी और डाक व्यवस्था को भी काफी हद तक ठीक किया।

दोस्तों गियासुद्दीन तुगलक और अल्लाउदीन खिलजी की तुलना करे तोह जमीन-आसमान का फ़र्क़ था. अल्लादुद्दीन खिलजी ने जब बाजार भाव को ठीक किया था तोह अगर कोई भी बाजार में घपला करते हुए पकड़ा गया तोह जितने का घपला उतना मांस उसके शरीर से निकल दिया जाता था. लेकिन गियासुद्दीन तुगलक ने ऐसा कुछ भी नहीं किया सारे जो कानून थे गियासुद्दीन तुगलक के शासन में वह बडे ही उदार थे और छोटे मोटे जुर्म में सजा भी नहीं होती थी.

अफसरों के साथ थोड़ा यह कठोर था क्योँकि इसका मानना था की अफसरों को ईमानदार होना चाहिए तोह अगर कोई अफसर कुछ घपला करते हुए पकडा गया तोह उसे बिलकुल भी न छोडा जाए उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाए.

फिर अदालती व्यवस्था को भी ठीक किया जो कोई भी अपनी फरयाद ले के आता था उसको न्याय उसी वक़्त मिल जाता था.

Expansion 

बंगाल में अपना विस्तार किया लेकिन बंगाल जो है आधिपत्य में आया. फिर दक्षिण में भी अपना विस्तार किया दरसल इसका जो बेटा था उलुघ खान जो बाद में मुहम्मद बिन तुगलक के नाम से जाना गया तोह १३२१ में गियासुद्दीन तुगलक ने अपने बेटे मुहम्मद बिन तुगलक भेजा वारंगल विस्तार करने के लिए.

अब वारंगल में उस वक़्त शासन कर रहे थे ककातिया और राजा थे प्रताप रूद्र उन्होंने सालाना भुगतान देने से मना कर दिया, वैसे में आपको बता दू की इसको अल्लाउद्दीन खिलजी ने जीता था और इन सब से वह सालाना भुगतान लेता था तोह जब खिलजी का शासन हटा तोह उसने सालाना भुगतान देने से मना कर दिया।

तोह १३२१ में मुहम्मद बिन तुगलक वहा बंगाल गया युद्ध के लिए, तोह बंगाल के जो मुख्या थे उस समय उन्होंने संपर्क काट दिया तोह दिल्ली से कोई जानकारी नहीं आ नहीं पा रही थी तोह जानकारी ना आने की वजह से यह अफवाह फेल गयी की गियासुद्दीन तुगलक की मृत्यु हो गयी और इसी चक्कर में मुहम्मद बिन तुगलक जीत नहीं पाया।

लेकिन फिर से आक्रमण किया ककातिया पर बडी सेना के साथ और प्रताप रूद्र को हरा दिया, अब जब प्रताप रूद्र को बंदी बना के ले आया गया दिल्ली में तोह ऐसा बोला जाता है की या तोह उसने आत्महत्या कर ली या फिर उसको कारागल में दाल दिया और वही पर उसकी मृत्यु हो गयी.

फिर बंगाल में भी अपना विस्तार किया, बंगाल में क्या हुआ था दोस्तों की तीन भाई जो थे वह गद्दी के लिए लड रहे थे, शियाबुद्दीन, नसीरुद्दीन और गियासुद्दीन (गियासुद्दीन तुगलक नहीं) तोह गियासुद्दीन ने शियाबुद्दीन को मार दिया और खुद गद्दी पर बैठ गया तोह अब नसीरुद्दीन ने गियासुद्दीन तुगलक से गुहार लगाई के हमारी मदद करो तोह गियासुद्दीन तुगलक ने नसीरुद्दीन की मदद की और गियासुद्दीन को हरा दिया और फिर नसीरुद्दीन को गद्दी मिली।

Death

मुहम्मद बिन तुगलक चाह रहा था की वह सुल्तान बने तोह मुहम्मद बिन तुगलक ने एक साज़िश रची, अफ्घानपुर में उसने एक लकड़ी का मंडप बनाया अब इस मंडप को इतना छोटा बनाया था की अगर कोई भी भारी चीज़ यहाँ पर आएगी तोह यह पूरा गिर जायगा तोह गियासुद्दीन तुगलक हाथी के साथ यहां आया और जैसे ही आया पूरा मंडप गिर गया गियासुद्दीन तुगलक पर और १३२५ में गियासुद्दीन तुगलक की मौत हो जाती है हालांकि गियासुद्दीन तुगलक अपने छोटे बेटे को बचाने के चक्कर में मर गए थे क्योँकि जब मलबा हटाया गया गियासुद्दीन तुगलक के ऊपर से और जब उनको हटाया गया तोह गियासुद्दीन तुगलक के निचे महमूद खान थे जो की गियासुद्दीन तुगलक के छोटे बेटे थे. 

अब आगे जाके सुल्तान बनते है मुहम्मद बिन तुगलक तोह इनकी जीवनी हम हमारे अगले Islamic Rulers of India के लेख में पढ़ेंगे।

तोह आशा करता हु आपको यह लेख पसंद आया होगा पसंद आया हो तोह अपने दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर किजयेगा और मेरी वेबसाइट को सब्सक्राइब कर लीजिए ताकि जो भी में लेख दालु उसकी सुचना आपको मिल जाए.