दोस्तों आज में एक शख्स की जीवनी ले कर आया हु जिन्होंने गणित बनाया, यह गोरे केहते है न गणित हमने बनाया या फिर गणित में सब ज़्यादा योगदान हमारा है यह सब झूठ है दरअसल यह तोह आर्यभट्ट की देन है और उन्ही से उन्होंने पूरा गणित सीखा है, भारत में इनके नाम से काफी यूनिवर्सिटी है और काफी प्रसिद्ध है पूरी दुनिया में तोह आज हम आर्यभट्ट की जीवनी देखेंगे और इनके बारे में जितनी भी जानकारी वह हिंदी में देखेंगे.

आर्यभट्ट जीवनी - Biography of Aryabhatta in Hindi

Early Life of Aryabhatta

इनके प्रारंभिक जीवन की बात करे तोह इनका जन्म ४७६ AD में हुआ था और ५५० में इनकी मृत्यु हो गयी थी. इनका जन्म हुआ था बिहार में कुसुमपुरा यह पातलियापुरा के नज़दीक है जिसे आज पटना कहा जाता है.

Aryabhatta Mathematician

दोस्तो आर्यभट्ट की बारे में सब से रोचक बात यह है की इन्होने पूरे गणित को संस्कृत से कोड किया है अब यह कमाल की बात है, और इन्होने अपने जीवन में दो सब से बड़े काम किये एक तोह आर्यभटीया और एक आर्य-सिद्धांता अब इस में इन्होने सब कुछ समझाया पूरा गणित, और उस वक़्त इनकी उम्र सिर्फ २३ साल थी.

यह आर्यभटीया किताब है और यह किताब उस वक़्त इन्होने लिखी जब किसी भी तहरा की टैकनोलजी नहीं थी ना ही कैलकुलेटर था, न टेलेस्कोप था, ना ही कंप्यूटर था उसके बावजूद भी सटीक कैलकुलेट करना सटीक मूल्य निकालना की सूरज पृथ्वी के इर्द-गिर्द घूमता है, फिर रोटेशन का मूल्य निकलना जो २४ घंटा है फिर दशमलव की खोज और 0 की खोज यह सब अदभुत है.

आर्यभट्ट जो है नालंदा यूनिवर्सिटी के मुखिया रह चुके है, और वही पर उनकी प्रयोगशाला थी और बेधशाला थी.

Aryabhatta books

जैसे मैंने पहले बताया आपको इनके दो काम जो है बहुत बड़े है एक तोह आर्यभटीया और दूसरा और आर्य-सिद्धांता, और ऐसा नहीं है की उन्होंने सिर्फ अपनी ज़िन्दगी में सिर्फ यह दो बड़े काम किये है इनके ज़्यादातर काम खो गए है.

Aryabhatiya Information

आर्यभटीय तोह आज स्कूलों में पढ़ाई जाती है और फिर ट्रिग्नोमैट्री, जोमेट्री सब का वर्णन इस आर्यभटीया में है, और इस किताब में आपको पढ़ने को मिलेगा अरिथमेटिक, अलजेब्रा, प्लेन ट्रिग्नोमैट्री, और स्फेरिकल ट्रिग्नोमैट्री, फिर क्वाड्रटिक एक्वेशन और ट्रिग्नोमेट्रिक टेबल तक इस किताब में है.

जैसे मैंने पहले कहा की इन्होने हर चीज़ का सटीक मूल्य का अनुमान लगया था और यह सब इन्होने अनुमान लगाया था अंको के बिना, आप देखेंगे जिस जिस चीज़ का मैंने ऊपर वर्णन किया गणित का तोह उपयोग किया ही नहीं है उन में सिर्फ छंदो का उपयोग किया गया है मतलब कोडिंग दी गयी है. जैसे कंप्यूटर में कोडिंग होती है हां उसके अंदर गणित शामिल होती है लेकिन बहार पूरा कोड है और उसी तहरा से आर्यभट्ट ने कोड उपयोग किये है हर चीज़ के लिए.

0 अब यह एक ऐसा अंक है जिसके बिना कोई सभ्यता नहीं चल सकती ना कोई देश चल सकता है सब से महत्वपूर्ण होता है दशमलव और यह 0. अगर 0 नहीं है तोह आप किस भी चीज़ का हिसाब नहीं लगा सकते और सब से असाधारण बात यह है की आर्यभट्ट से पहले यह 0 रहा होगा.

आर्यभटीया की बात करे तोह इस किताब में १०८ छंद है और ४ इस में पाठ है, अब हर छंद को काफी गहराई में लिखा गया है और हर एक पाठ एक खास विषय के साथ जुड़ा हुआ है जोके आज हम पढ रहे है.

  • पहला है गीतकापड़ इस में १३ छंद है इस छंद में आपको समय के बारे में सिखने को मिलेगा, जैसे ज़रूरी नहीं है की हमारे ग्रह पर जो वक़्त है वह दूसरे ग्रह पर भी वही समय हो, ब्लैकहोल अब वह पर समय बहुत धीरे चलता है हमारा १००० साल वह के १ मिनट के बराबर है तोह आर्यभट्ट ने इस में समय के बारे में  बताया है.


  • दूसरा है गणितपद अब इस में आपको पूरा गणित समझने को मिलेगा जो की आज हम पढ़ते है जैसे सिंपल, क्वाड्रैटिक आपको पता है समीकरण सब से महत्वपूर्ण होते है हर चीज़ को ग्राफ के माध्यम से निरूपित किया जाता है उदहारण के रुप में इंसानो को कैसे समझा जाता है उसका समीकरण बनाकर, पूरे जीवन को आप समीकरण से समज सकते है इस में ३३ छंद है.


  • तीसरा है कलक्रियापद इस में २५ छंद है इस में भी आपको समय के बारे में पढ़ने को मिलेगा जैसे ग्रह एक दिन में उसकी स्तिथि क्या होगी फिर ग्रहण के बारे मैं बताया गया है 


  • फिर आखरी अध्याय है गोलापद इस में ५० छंद है इस में ट्रिग्नोमैट्री, जोमेट्री सब के बारे में बताया गया है, पृथ्वी के आकर के बारे में बताया गया है और राषि इनके बारे में भी बताया गया है 

Arya-Siddhanta

अब दूसरी इनकी किताब आर्य-सिद्धांता वैसे इसके बारे में इतनी जानकारी नहीं है क्योँकि वक़्त के साथ इससे जुडी काफी सारी जानकारी खो गयी है, लेकिन यह पूरी किताब एस्ट्रोनॉमी और एस्ट्रोलॉजी के बारे में बताती है.

कई लोग एस्ट्रोलॉजी को अन्धविश्वास मानते है लेकिन कुछ लोग इसको विज्ञान ही मानते है, एस्ट्रोलॉजी में देखा जाए तोह बहुत सारा भौतिक विज्ञान शामिल है और कहा जाता है की जितने भी ग्रह है उनकी एनर्जी हमसे जुडी है.

प्राचीन भारत में क्या था विज्ञान को कोई इतना मानता नहीं था लेकिन अगर उनको धर्म के माध्यम से समझाया जाता था तोह वह तुरंत समज जाते थे तोह आर्यभट्ट ने इसको धर्म के साथ जोड़ दिया और फिर सब को समझाया की यह एस्ट्रोनॉमी और एस्ट्रोलॉजी विज्ञान ही है.

अब ग्रह के साथ हम जुड़े हुए है विज्ञान तोह यही कहती है तोह अगर कही पर भी कुछ बदल रहा है तोह वह बदलाव हमारे में भी आएगा अब एस्ट्रोलॉजी यहां पर शामिल है.

आर्य-सिद्धांता में आपको एस्ट्रोनॉमी और एस्ट्रोलॉजी के बारे में काफी कुछ जान्ने को मिलेगा वैसे तोह आर्यभटीया में भी आपको एस्ट्रोनॉमी पढ़ने को मिलेगी.

अब तीसरा है अल-नन्फ़ यह एक अरेबिक शब्द है, प्राचीन भारत में पहले अरबस आये थे और काफी कुछ सिख के गए उन्होंने यहाँ पर पढ़ाई की और फिर अरब जाकर उन्होंने दुसरो को सिखाया.

तोह दोस्तों यह थी आर्यभट्ट की जीवनी हिंदी में, आशा करता हु आपको पढ़ने में आनंद आया होगा.

दोस्तों कोई भी सुझाव हो तोह आप मुझे कमेंट के ज़रिये या फिर आप मुझे मेरे ईमेल पर संपर्क कर सकते है, और दोस्तों मेरी इस वेबसाइट को सब्सक्राइब कर लीजिए ताकि आपको ऐसे ही रोचक जीवनी और दूसरे लेखो की सुचना आपको मिल जाए.

धन्यवाद