दोस्तों आज में आपके लिए लेकर आया हु एक किताब का सारांश और इस किताब का नाम है As a Man Thinketh. यह एक प्रेरक किताब है और इस किताब को लिखा है James Allen ने. और इस किताब की कमाल की बात यह है की यह किताब बेहद छोटी है और अगर आप इस किताब को खरीदते है तोह आप एक ही दिन में इस किताब को पूरा पढ सकते है.

इस किताब में जो कुछ लिखा है वह बिलकुल सच है हर एक बात जो लिखी है वह बिलकुल सच है, इस किताब में बताया गया है की आप जो कुछ भी सोचते है वह सच हो जाता है और हम्मे से ज़्यादातर लोग इस बात को मानते है.

तोह दोस्तों शुरू करते है As a Man Thinketh का सारांश और इस किताब का हर एक पहलु को में बारीकी से समझाऊंगा.


As a Man Thinketh Book Summary in Hindi


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As a Man Thinketh Book Summary in Hindi

As a Man Thinketh इस किताब को James Allen ने काफी साफ़ सब्दो में और आसान सब्दो में लिखा है और इस किताब का समग्र विचार यह है की आप जो सोचते है आप वैसे ही बन जाते है. आज हम ज़िन्दगी में जो कुछ भी कर रहे है वह हमसे हमारी सोच करवाती है.

हमारे जो भी विचार होते है वह बीज की तहरा होते है और जो हमारा दिमाग होता है वह खाली जमीन की तहरा वह बीज हमारे दिमाग में फूटता है फिर पौधा बनता है और एक दिन पूरे दिमाग में हावी हो जाता है, फिर वह चीज हमारे व्यवाहर में नज़र आने लगती है और व्यवाहर में नज़र आता है तोह आपका दिमाग भी आपसे वैसे ही काम करवायगा। और हमारा दिमाग हमे वैसे ही काम करवायगा जिसके परिणाम भी वैसे ही होंगे.

कहना का तात्पर्य यह है की आज हम जो कुछ भी है वह हम हमारी सोच की वजह से है, यह दिमाग हमारा हत्यारो का गोदाम है जहा अच्छे हत्यार भी मिलेंगे और बुरे भी, गोदाम हमारा है हमारी मर्ज़ी है हमे जैसे भी हत्यार रखना चाहे.

यह गोदाम के साथ साथ हमारा घर भी है और अगर हम इस घर को सही से नहीं चला पाए तोह इस घर के दूसरे सदस्य यानी शरीर और दूसरे अंग उनको तकलीफ होगी, हमेशा याद रखना हमारा शरीर हमारे दिमाग का नौकर है और दिमाग मालिक.

हमे हमेशा यह सुनिश्चित करना चाहिए की क्या हम जो सोच रहे है क्या वह सही भी है? लेकिन हम यह सब नहीं करते क्योँकि इस में मेहनत लगती है और किसी को भी अपनी ही कही हुई बात या अपनी ही सोच गलत कभी नहीं लगती, सबको यही लगता है की में तोह सही सोच रहा हु लेकिन हमे पता तब लगता है की जब हम हम बुरी परिस्थिति में पोहच जाते है.

जैसे मैंने पहले कहा हमारा दिमाग खाली जमीन की तहरा है इस पर क्या उघाना है यह हम पर है, आपने अपने आस पास देखा होगा खाली जमीन को जहा पर अगर कोई ध्यान नहीं देगा तोह वहा पर जंगली घास जंगली पेड-पौधे यह सब चीजे उघ जायगी लेकिन अगर कोई उस खाली जमीन को ध्यान दे तोह उस खाली जमीन पर वह एक बगीचा बना सकता है.

आपने देखा होगा एक माली अपने बगीचे का ख्याल कैसे रखता है अगर बगीचे में जंगली घास उघ जाए तोह वह उसे निकाल कर फेक देता है क्योँ फेक देता है? क्योँकि वह अपने बगीचे को खराब नहीं होने देना चाहता। वैसे ही हमारा दिमाग है गंदे लोगो से मिलने पर गंदे खयाल रखने से हमारे दिमांग में गंदगी भड़ती रहती है अगर इसे नहीं रोका गया तोह यह दिमाग पर हावी हो जायगा.

हमारे विचार को पहचानना यह सब से मुश्किल काम है की कौन से सही विचार है और कौन से गलत, इसलिए अगर आप अपने आस पास कभी भी देखोगे तोह जो बहार परिस्थिति होती है वह हमारे दिमांग में जो परिस्थिति होती है उसी की वजह से है. मतलब आज आप जो कुछ भी हो उसे आपके विचार आप तक लेकर आये है और यह जो वक़्त है वह निकल जायगा और दूसरा अच्छा वक़्त आएगा लेकिन यह निर्भर करता है की गुज़रे हुए वक़्त से आपने क्या सीखा.

देखिये आप अपनी परिस्थिति पर काबू नहीं पा सकते आपकी जो परिस्थिति है वह तोह है लेकिन आपके दिमाग में जो विचार है उसपर आप काबू पा सकते है या फिर जो भी विचार है वह आप तय कर सकते है की यह विचार दिमाग में जाना चाहिए और यह नहीं, उस जमीन पर क्या ऊघेघा और क्या नहीं यह सब में तय करूँगा. अगर आप अपने विचारो में बदलाव लाओगे अच्छे विचार रखोगे तोह आपको आपकी परिस्थिति में भी बदलाव देखने को मिलेगा.

अभी आप मेरा यह सारांश पढ़ रहे हो क्योँ पढ़ रहे हो? क्योँकि हो सकता है की आप अपनी परिस्थिति से खुश न हो, हो सकता है की आप ऐसे ही जानकारी के लिए पढ़ रहे हो. लेकिन आप पढ़ रहे हो एक सार्थक किताब का सारांश जो आपके दिमाग में एक अच्छा बीज बोयेगा और उसका फल आपको देर-सवेर ज़रूर मिलेगा.

सोचो लोग जेल क्योँ जाते है क्योँकि उस व्यक्ति की सोच ही ऐसी है और जो गुनाह किया है वोह ऐसे ही एकदम से नहीं हो गया उसने वह सोच काफी वक़्त से अपने दिमाग में रक्खी होगी और मौका आने पर वह सोच सामने आयी और उसने गुनाह करवा दिया. फिर वह व्यक्ति जेल जाके किसको दोष देगा वह तो कहेगा की मेरी तोह परिस्थिति ही ऐसी है. लेकिन परिस्थिति ने नहीं कहा था की गुनाह कर गुनाह तोह दिमाग में पनप रहा था बहुत पहले से ही.

अब मान लो आपके साथ कुछ गलत हो गया किसी ने आपको थप्पड़ लगा दिया तोह उस बात को वही भूल जाओ तोह अच्छा है बहुत कुछ होने से बच जायगा, लेकिन उस चीज को याद कर के अपने दिमाग में वह बीज दाल दो तोह शायद कुछ ऐसा बुरा हो जो इस थप्पड से बहुत ही बुरा होगा.

हम्मे से ज्यादातर लोग अपनी परिस्थिति को सुधारना चाहते है लेकिन खुद को बिलकुल भी सुधारना नहीं चाहते, खुद की आदतों को सुधारना नहीं चाहते. अगर हम अपने अहंकार को नज़रअंदाज़ कर के अपने आप में झाकें और देखे की हां कही न कही हम ही है गलत और हम से ही कुछ गलत हो रहा है तोह शायद चीजे सुधर जाए.

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कोई गरीब आदमी है अब अगर उसे अमीर आदमी बन्ना है तोह उसे काम करना पडेगा, आराम छोड कर मार्केट में घूमना पडेगा लेकिन अगर वह यह नहीं करना चाहता मतलब वह अपने आप को बदलना नहीं चाहता. ऐसे ही अमीर लोग होते है उनको बहुत सी बीमारिया होती है और अजीब अजीब बीमारिया होती है और उसके लिए वह डॉक्टर को लाखो रूपये देने की लिए तैयार है की कोई डॉक्टर तोह उनकी बीमारी को ठीक कर दे लेकिन जो उनके खानपान की आदत है उसको वह बदलना नहीं चाहते.

आपने अक्सर यह सुना होगा की ईमानदार इंसान अपनी ज़िन्दगी में कभी भी तरक्की नहीं कर सकता उसे बेईमानी करनी ही पड़ती है लेकिन कभी आपने सोचा है की उस बेईमान इंसान में कुछ तोह खूबी रही होगी जो उस ईमानदार इंसान में नहीं है या फिर ऐसा भी हो सकता है की उस ईमानदार इंसान में कुछ बुराई रही होगी जो उस बेईमान इंसान में नहीं है, शायद वह ईमानदार इंसान अपने आप से बारबार यही कह रहा हो की अपनी ज़िन्दगी में तोह गरीबी ही लिखी है इस लिए वह शायद ऐसे ज़िन्दगी जी रहा है.

इतना तोह पक्का है की अच्छा सोचने वाले को बुरे परिणाम कभी नहीं मिलते एक आम का बीज इमली का पैड कैसे उघा सकता है, शिकायत करने वाले बहुत है आसपास जैसे मुझे यह पसंद नहीं है मुझे वह पसंद नहीं है लेकिन कभी खुद में झाँक के देखा है की लोगो को तुममे क्या पसंद है लेकिन वह चीज़ हम नहीं करते क्योँकि वह करने में हमारे अहंकार को तकलीफ होती है.

हमारे विचारो का असर हमारे शरीर पर भी पड़ता है, आपने सुना होगा की कई लोग सोच सोच के बीमार पड जाते है लेकिन अच्छा सोचोगे तोह शरीर तंदुरस्त रहेगा उदहारण के तौर पर अगर आप जानबूछ कर अच्छा खाना खाने की कोशिश कर रहे हो तोह कुछ नहीं होगा लेकिन वही अगर कोई आकर यह कह दे की यह फास्ट फूड जो तुम खा रहे हो वह किस तरीके से बनता है तुझे पता है? तोह अपने आप हमारी ऐसा खाना खाने की इच्छा मर जायगी और फिर शरीर में अपने आप सुधार आ जायगा.

आपने देखा होगा या महसूस भी किया होगा की जो भी विचार दिमाग में आता है वह उससे दिशाहीन तरीके से बहने देते है और यह चीज़ बहुत बुरी है अगर ऐसा होने दिया जाए ऐसे लोगो को आगे जाके मुस्किलो का सामना करना पड़ता है. इस लिए बेहद ज़रूरी है की अपने विचार को अपने लक्ष्य से जोड़ो अपने विचार पर काबू पाओ और यह छोटी छोटी चीजों पर खुश होना छोड दो क्योँकि यह छोटी छोटी चीजे आपको थोडे वक़्त के लिए खुशी देंगे और तब आपके दिमाग को लगेगा की मुझे कुछ ऐसा करना होगा की जिस्से इस इंसान को और मुझे बड़ी खुशी मिले.

अगर एक अमीर इंसान गरीब इंसान की मदद करता है तोह अब वह उस गरीब इंसान पर है की वह उस मदद को कैसे लेता है अगर वह यह सोच कर लेता है की आज का काम तोह हो गया और खुश हो जाता है तोह वह जिंदगी भर वैसा ही रहेगा अगर वह इस मदद को ऐसे समझकर लेता है की एक दिन में भी इस आदमी की तहरा गरीबो की मदद करूँगा ऐसा बोलकर या फिर ऐसा सोचकर वह खुद की ही मदद करता है जितना अपनी सोच को ऊपर उठाओगे उतना ऊपर खुद उठ जाओगे.

जो लोग कुछ करना चाहते है कुछ अच्छा कुछ नया करना चाहते है उनके सपने हमेशा पूरे होते है. जैसे के Columbus ने सपना देखा था की में इस देश के अलावा एक और देश ढूंढूंगा और तब जाकर उसने America खोजा, उसने ढूंढा की इस दुनिया में जो कुछ भी इंसान ने ढूंढा है या जो कुछ भी प्राप्त किया है पहले एक सपना ही तोह थी, इंसान ने सोचा तभी वह प्राप्त कर सका.

आशा करता हु की आपको यह As a Man Thinketh का सारांश पसंद आया होगा. दोस्तों अगर आपको यह सारांश पसंद आया हो तोह अपने दोस्तों से ज़रूर शेयर करे और मेरी वेबसाइट को सब्सक्राइब कर लीजिए ताकि में जब भी कोई लेख दालु उसकी सुचना आपको मिल जाए.

धन्यवाद