हेलो दोस्तों आज हम पढ़ेंगे नसीरुद्दीन महमूद जीवनी - Biography of Nasiruddin Mahmud in Hindi. यह भी गुलाम वंश के शासक थे और यह ८ वे शासक थे गुलाम वंश के, नसीरुद्दीन महमूद के साथ ही साथ हम मसूद शाह और बेहराम शाह के बारे मैं भी जानेंगे.

नसीरुद्दीन महमूद जीवनी - Biography of Nasiruddin Mahmud | Hinglish Posts


दोस्तों यह जीवनी पढ़ने से पहले आप रज़िया सुल्तान की जीवनी ज़रूर पढ़े. क्योँकि मैं इस्लामिक सासको की जीवनी क्रमवार ले कर आ रहा हु ताकि लोगो को पढ़ने मैं आसानी हो और समझने मैं भी आसानी हो.

Who Was Bahram Shah

दोस्तों पिछला जो व्याख्यान था वह रज़िया सुल्तान पर था हमने देखा की कैसे एक औरत होने के बावजूद उसने सारे साम्रज्य को कुशल तरीके से संभाला, लेकिन इनका शासन लम्बे वक़्त तक नहीं चल पाया क्योँकि राजदरबारियों की साज़िश और अल्तुनिआ से जंग मैं वह हार गयी थी.

रज़िया सुल्तान का शासन चला था १२३६ से लेकर १२४० तक, और बाद मैं इन्हे मार दिया जाता है जिसमें राजदरबारियों का हाथ होता है. अब गद्दी का उमेदवार इसका सौतेला भाई होता है बहराम शाह.

तोह बेहराम शाह शासक बनते है और १२४० मैं एक और पद इजात किया गया था "नायब" का, नायब का जो पद था वह सुल्तान के बाद का सब से बड़ा पद था और इसके बाद आता था वज़ीर.

बेहराम शाह को राजदरबारियों के सहयोग से सुल्तान बनाया गया लेकिन असली ताक़त किसके पास आ गयी राजदरबारियों के पास. बेहराम शाह का शासन वैसे लम्बा नहीं चल पाया १२४० से लेकर १२४२ तक ही यह शासन कर पाया, क्योँकि १२४२ मैं राजदरबारियों के कहने पे इसको मार दिया गया था.

अब इसके शासन मैं एक एहम चीज़ हुई थी वह थी मंगोल आक्रमण. जी हां १२४१ मैं मंगोल ने आक्रमण कर दिया था और पहला आक्रमण था मुल्तान पर और मुल्तान का राजयपाल था कबीर खान लेकिन कबीर खान काफी बहादुरी से मंगोलो को खदेड दिया.

तोह पहले आक्रमण मैं तोह मंगोल असफल रहे लेकिन जब दूसरा आक्रमण लाहौर पे किया गया उसमें मंगोल सफल हो गए, हुआ यह की मंगोल आये मंगोल ने लाहौर पर अपना कब्ज़ा जमा लिया पूरा लाहौर को लूट लिया और वापस चले गए अफ़ग़ानिस्तान के रास्ते, हालाकि उन्होंने आपने शासन स्थापित लाहौर मैं नहीं किया सिर्फ लूट के चले गए.

अब इस वजह से बेहराम शाह पर काफी सवाल उठने लगे की आपने इन्हे रोका नहीं, आपने कुछ किया नहीं, राजदरबारियों की आँखों मैं अब खटकने लगे थे बेहराम शाह और इसके बाद बेहराम शाह को मार दिया गया राजदरबारियों के कहने पर.

अब इसके बाद रुक्न उद-दिन के बेटा अला उद-दिन मसूद, रुक्न उद-दिन किसका बेटा था इल्तुतमिश का तोह इल्तुतमिश का पौता था अला उद-दिन मसूद.

Who Was Masud Shah 

तोह मसूद शाह था इल्तुतमिश का पौता जिसे बेहराम शाह के बाद सुल्तान बनाया गया राजदरबारियों के सहयोग से. और इसका शासन चला था १२४२ से लेकर १२४६ तक.

मसूद शाह ७ वा सुल्तान था गुलाम वंश का, अब इसके अंदर इतनी क्षमता नहीं थी शासन करने की और यह सिर्फ राजदरबारियों के इषारो पर काम करता था, एक तहरा से कठपुतली था यह राजदरबारियों का.

अब यहाँ पर आगमन होता है बलबन का, दोस्तों बलबन के बारे में मैं आपको अलग से अपने आने वाले व्यख्यान में मैं आपको बताऊंगा और यह जो व्यख्यान होगा न यह बहुत ही एहम होगा क्योँकि बलबन के आने के वजह से भारत के इतिहास को एक नया मौड़ मिला था.

तोह जब मसूद शाह सुल्तान था तोह राजदरबारियों के समूह मैं बलबन भी था, अब बलबन ने यहाँ पर एक षड्यंत्र रचा, बलबन ने मन बना लिया था की मसूद शाह को गद्दी से हटाना है और नसीरुद्दीन महमूद को नया सुल्तान बनाना है.

तोह बलबन ने षड़यंत्र रचा जितने भी और राजदरबारी थे उनको अपने साथ किया और अला उद-दिन मसूद को १२४६ मैं मरवा डाला, तोह मसूद शाह का शासन चला १२४२ से १२४६ तक.

तोह १२४६ मैं फिर आते है नसीरुद्दीन महमूद, यह भी इल्तुतमिश के पौते ही होते है, अब यह भी राजदरबारियौ के सहयोग से ही सुल्तान बने होते है.

Who Was Nasiruddin Mahmud

नसीरुद्दीन महमूद का शासन लम्बा चला था इनका शासन चला १२४६ से लेकर १२६६ तक. जैसे मैंने पहले आपको कहा की एक नए पद का इजात किया गया था "नायब" का तोह नसीरुद्दीन महमूद के शासन मैं नायब था बलबन.

१२४९ बलबन ने अपनी बेटी की शादी नसीरुद्दीन महमूद से करा दी थी, नसीरुद्दीन महमूद ८ वा सुल्तान था गुलाम वंश का. अब जो बलबन था वह काफी ऊपर चला गया था एक नायाब का पद मिल गया था दूसरा सुल्तान का ससुर भी बन गया था, नसीरुद्दीन महमूद के शासन मैं बलबन का बहुत ज़्यादा प्रभाव था.

इतिहासकार बताते है की नसीरुद्दीन महमूद बहुत ही धार्मिक इंसान था और संत आदमी था, और संत लोग साम्रज्य को अच्छे से नहीं चला सकते लेकिन जैसे हमने देखा की इसका जो शासन था वह लम्बा था तोह लम्बा शासन था मतलब अच्छा शासन रहा होगा.

लेकिन लम्बा शासन तोह राजदरबारियौ के वजह से रहा था, और नसीरुद्दीन महमूद कभी भी राजदरबारियौ के खिलाफ नहीं गए और इसी वजह से नसीरुद्दीन महमूद इतना लम्बा शासन कर पाए थे.

१२५३ मैं बलबन को हटाने की कोशिश की गयी थी उसके पद से, हुआ यह था की जो भी एहम पद थे उस पर अपने रिश्तेदारों को बिठाना शुरू कर दिया था, बलबन चाहता था की राजदरबारी जो है उनका प्रभाव कम हो जाए और बलबनो का प्रभाव पड़ना शुरू हो जाए.

लेकिन इस बात की खबर पड़ गयी राजदरबारियों को तोह १२५३ मैं कुछ राजदरबारियों ने समूह बनाया और नसीरुद्दीन महमूद के पास पोहच गए बलबन के षड़यंत्र को बताने के लिए.

तोह नसीरुद्दीन महमूद बलबन के खिलाफ हो गया था और बलबन को उसके पद से हटा दिया था लेकिन फिर जो नया नायब आया और तब जो राजदरबारी थे उन्हें लगा की यह तोह बहुत ही बेकार नायब है इस्से अच्छा तोह बलबन ही था.

बलबन को दुबारा लाया गया और फिर वह आखिर तक नसीरुद्दीन महमूद के साथ रहा और फिर १२६६ मैं नसीरुद्दीन महमूद की मृत्यु हो गयी और इसी के साथ नसीरुद्दीन महमूद का शासन ख़तम हुआ.

लेकिन नसीरुद्दीन महमूद के शासन मैं सब से ज़्यादा फायदा बलबन को हुआ था, अपनी बेटी की शादी नसीरुद्दीन महमूद से करवा दी ताकि सुल्तान की जो गद्दी है वह मेहफूस रह सके.

और यही हुआ जब नसीरुद्दीन महमूद की मृत्यु हुई १२६६ मैं तोह बलबन ने गद्दी पर अपना कब्ज़ा जमा लिया, पूरी कहानी क्या है और बलबन का शासन कैसे चला और कहा कहा तक फैला यह हम देखेंगे अगले व्याख्यान मैं.

तोह दोस्तों यह थी नसीरुद्दीन महमूद जीवनी - Biography of Nasiruddin Mahmud in Hindi.