हेलो दोस्तों आज गुलाम वंश के आखरी सुल्तान के बारे मैं बात करेंगे मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद यह १० वे सुल्तान थे, सिर्फ १७ साल के थे तब इनको गद्दी सौप दी गयी थी तोह इनके बारे मैं आज जानेगे इनकी जीवनी देखेंगे तोह चलिए शुरू करते है मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद जीवनी - Biography of Muizuddin Qaiqabad in Hindi.

मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद जीवनी - Biography of Muizuddin Qaiqabad in Hindi | Hinglish Posts



दोस्तों आज की यह जीवनी मिलाकर गुलाम वंश की श्रृंखला का अंत होगा इस जीवनी को पढ़ने से पहले आप मेरे गुलाम वंश पर जो दूसरे ९ व्याख्यान है पहले उन्हें पढ़े. और अब गुलाम वंश के बाद हम खिलजियों के बारे मैं जानेंगे.

Who Was Muizuddin Qaiqabad

घियासुद्दीन बलबन की जीवनी मैं हमने देखा की उसके बड़े बड़े मोहम्मद की मृत्यु हो जाती है और बलबन चाह रहा था की सिर्फ मोहम्मद ही गद्दी को संभाले लेकिन खैर उसकी मृत्यु हो गयी, तोह घुयासुद्दीन बलबन ने कह दिया की अब गद्दी पर मेरा पौता कई खुसरव बैठेगा मतलब अगला सुल्तान यह बनेगा कई खुसरव मोहम्मद का बेटा था.

लेकिन घियासुद्दीन बलबन की मृत्यु हो जाती है और कई खुसरव को हटा दिया गया और फिर सुल्तान बना मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद. अब यह मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद बुग़रा खान का बेटा था और मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद भी घियासुद्दीन बलबन का पौता था.

मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद के बारे मै इतिहासकार बताते है की यह बहुत खूबसूरत, शिक्षित और संस्कृति का पालन करने वाला व्यक्ति था. लेकिन इसके पास अनुभव नहीं था क्योँकि किशोरावस्था मैं ही यह गद्दी पर बैठ गया था.

जैसे ही मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद को गद्दी दी गयी तोह जब उसने देखा की सुल्तान की ताक़त क्या होती है और जो शान-ओ-शौकत देखी तोह वह इसमें ही डूब गया. इतिहासकार बताते है की यह दिन रात अय्यासी करता था और लडकिया इसकी सब से बड़ी कमज़ोरी थी तोह दिन रात बस इसी मैं यह लगा रहता था न उसको शासन की पड़ी थी नाही उसे जनता की.

लेकिन इतिहासकार यहाँ हमे यह भी बताते है की मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद ऐसा था नहीं ऐसा इसको बना दिया गया था, कहा जाता है की दिल्ली का कोतवाल फखरुद्दीन इसका दामाद निजामुद्दीन यह निजामुद्दीन दिल्ली का अफ़सर था तोह निजामुद्दीन, मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद के बहुत करीब आ गया था और इसी की वजह से मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद अपना रास्ता भटक गया था.

निजामुद्दीन जिगरी दोस्त बन गया था मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद का लेकिन निजामुद्दीन के दिल मैं कुछ और ही चल रहा था वह मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद को हटाना चाहता था. तोह निजामुद्दीन, मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद के बुरे कामो को सही कहता था और कहता था की तुम बिलकुल सही जा रहे हो तोह मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद ताकत के नशे मैं डूबता चला गया और वही दूसरी और प्रशासन गिरता चला गया.

हमने घियासुद्दीन बलबन के जीवनी मैं देखा था की कैसे सुल्तान के खोये हुए सम्मान को उसने फिर से पुनर्निर्माण किया था लेकिन मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद ने फिर से सुल्तान के पद को निचे गिरा दिया.

इस सब के बारे मैं मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद के पिता बुग़रा खान को पता चलता है, बुग़रा खान उस वक़्त बंगाल के राजयपाल थे तोह जब उन्हें अपने बेटे की अय्यासी के बारे मैं पता चलता है तोह वह अपने बेटे को बहुत सारे खत लिखते है लेकिन मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद नहीं सुधरता.

आखिरकार न चाहते हुए भी बुग़रा खान दिल्ली की तरफ चल दिया अपने ही बेटे मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद से युद्ध करने के लिए, वही दूसरी और मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद का जिगरी दोस्त निजामुद्दीन ने उसके कान भरा चालु कर दिया और उसे उकसाता रहा की वह भी अपने पिता के साथ युद्ध करे.

अयोध्या के पास बुग़रा खान और मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद युद्ध के लिए आये हुए होते है लेकिन युद्ध नहीं होता, दोनों के बिच बात चीत होती है और बुग़रा खान समझाता है की यह सुल्तान के पद की बेइज़्ज़ती मत करो तोह मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद समझा नहीं समझा क्योँकि तब भी वह किशोरावस्था मैं ही था.

और बुग़रा खान ने एक और बात मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद से की थी की तुम अपने सलाहकार निजामुद्दीन को उसके पद से हटा दो, अब मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद को जब निजामुद्दीन की असलियत पता चली तोह उसने निजामुद्दीन से कहा की तुम मुल्तान चले जाओ लेकिन निजामुद्दीन ने मना कर दिया तोह मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद के कहने पर निजामुद्दीन के खाने मैं ज़हर मिलवा दिया और उसको ज़हर दे दिया और इस ज़हर से निजामुद्दीन की मृत्यु हो जाती है.

लेकिन मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद की अय्यासी तोह ख़तम हुई ही नहीं और इस अय्यासी की वजह से प्रशासन निचे गिरता गया और अय्यासी मैं यह इस कदर चूर हो गया की इसका शरीर मैं कुछ बचा ही नहीं येह एकदम पतला सा हो गया था और फिर यह बहुत बीमार पड़ गया और इसी बीमारी के चलते इसे लकवा मार गया.

बीमार हो जाने की वजह से दुसरो के लिए रास्त साफ़ हो गया जितने भी लोग थे उस वक़्त जिन मैं क्षमता थी की वह सुल्तान बन सकते है वह गद्दी के लिए आगे आ गए और इन मैं से एक था जलालुद्दीन और यह अफ़ग़ानिस्तान से आया था.

और जलालुद्दीन को मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद ने अपनी सेना का सेनापति बनाया था, तोह जलालुद्दीन ने सत्ता को अपने हाथ मैं लेने की साज़िश शुरू कर दी.

मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद काफी बीमार हो गया था इस लिए उसने अपनी सत्ता मलिक कछन और मलिक ऐतवार सुर्खा को सौप दी और उसके बाद वह कही चला गया और सुल्तान बना दिया अपने ३ साल के बेटे को, क्योँकि गद्दी तोह परिवार के बेटो को ही मिलती है तोह सुल्तान बना दिया अपने ३ साल के बेटे कयूमर को और प्रशासन का सारा काम सौप दिया था मलिक कछन और मलिक ऐतवार सुर्खा को.

और जलालुद्दीन तोह तेज़ी ऊपर आ रहा था और अपनी ही रणनीति मैं लगा हुआ था की कैसे मैं गद्दी छीन लू तोह जलालुद्दीन ने कयूमर को मार डाला, तोह मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद तोह चला ही गया था और बेटे कयूमर को मार दिया गया तोह पूरी सत्ता हाथ मैं आ गयी जलालुद्दीन ख़िल्जी के पास.

जी हा यह जलालुद्दीन था जलालुद्दीन खिलजी यहाँ से उदय होता है की खिलजी वंश का. जलालुद्दीन खिलजी दिल्ली सल्तनत का नया सुल्तान बना और इसी के साथ ग़ुलाम वंश का अंत हुआ और खिजियोँ का शासन यहाँ पर शुरू हुआ.

तोह अगला जो व्याख्यान होगा वह जलालुद्दीन खिलजी के बारे मैं होगा और फिर हम अल्लाउद्दीन खिलजी के बारे मैं जानेंगे. तोह दोस्तों यह थी मुइज़ुद्दीन क़ैक़ाबाद जीवनी - Biography of Muizuddin Qaiqabad in Hindi.