हेलो दोस्तों आज हम बात करेंगे ज्योतिरादित्य सिंधिया की, आज कल इनके बहुत चर्चे हो रहे है क्योँकि इन्होने किया ही ऐसा की रातो रात यह प्रसिद्ध हो गए, वैसे इन्होने जो किया उसकी अपेक्षा तोह थी ही की ऐसा वोह करेंगे ही अब इनके इस कदम की वजह से मध्य प्रदेश की राजनीति पूरी तरीके से बदल गयी है, और बहुत ज़्यादा संभावना है की मध्य प्रदेश मैं कांग्रेस की सरकार गिरेगी ही. तोह चलिए जानते है इनके  बारे मैं और शुरू करते है ज्योतिरादित्य सिंधिया जीवनी - Biography of Jyotiraditya Scindia in Hindi.

ज्योतिरादित्य स्किनडीए जीवनी - Biography of Jyotiraditya Scindia in Hindi | Hinglish Posts


Scindia Family History

तोह ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिताजी माधवराव सिंधिया बहुत बड़े नेता थे कांग्रेस के लेकिन २००१ मैं इनकी मौत हो गयी विमान दुर्घटना मैं और इसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया राजनीति मैं आये और यह कांग्रेस के साथ जुड़ गए. २००१ से लेकर २०२० तक यह कांग्रेस का साथ रहे १९ साल तक कांग्रेस मैं थे.

सिंधिया परिवार जो है वह राजसी परिवार है और इनका शासन ग्वालियर पर था तोह ज्योतिरादित्य सिंधिया राजा रजवाड़ो के खानदान से आते है. अब जब १९५० मैं हमारा संविधान आया तोह जो भी राजा के पास शीर्षक था वह उनको त्यागने पड़ा क्योँकि हमारे यहाँ राजशाही तोह है नहीं, तोह प्रावधान यह किया गया की Privy Purse मिलती रहेगी.

Privy Purse का मतलब राजा रजवाड़ो को एक तरीके से पेंशन मिलती रहेगी क्योँकि इतने साले से इनका साम्रज्य चलता आ रहा था तोह उसके लिए इनको पेंशन मिलेगी, हालांकि इंदिरा गाँधी ने १९७१ मैं यह Privy Purse की प्रथा को बंध कर दिया था.

ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी विजयराजे सिंधिया ने १९५७ मैं कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े इन्होने गुणा से चुनाव लड़ा था वहा से वोह जीत गयी, और इसके बाद तोह यह बार बार जीतती गयी क्योँकि इन्होने अपना वर्चस्व ऐसा बना लिया था की जब भी चुनाव लड़ती वोह जीत जाती.

लेकिन जब प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का देहांत हुआ और इंदिरा गाँधी आयी राजनीति मैं तोह यहाँ से राजनीती पूरी बदल गयी, क्योँकि इंदिरा गाँधी से बहुत लोगो के मतभेद थे और विजयराजे सिंधिया के भी थे तोह विजयराजे सिंधिया ने कांग्रेस पार्टी को छोर दिया और स्वतंत्र पार्टी के साथ जुड़ गयी.

स्वतंत्र पार्टी उस वक़्त काफी बड़ी पार्टी थी बहुत मत मिलते थे उस वक़्त हाल फिलहाल इस पार्टी को इतने मत नहीं मिलते तोह स्वतंत्र पार्टी बारे मैं कहा जाता था की यह राजा रजवाड़ो की पार्टी है, विजयराजे सिंधिया ज़्यादा वक़्त तक इस पार्टी के साथ जुडी नहीं रही इसके बाद विजयराजे सिंधिया भारतीय जन संघ के साथ जुड़ गयी.

और संयोग तोह देखिये जब विजयराजे सिंधिया ने कांग्रेस को छोड़ कर भारतीय जन संघ से जुडी थी तोह उस वक़्त भी कांग्रेस की सरकार गिरी थी और आज ५२ साल बाद इनके पौते ज्योतिरादित्य सिंधिया ने वही चीज कर दी.

अब इसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया ने १९७१ मैं गुणा से चुनाव लड़ा वहा से वह जीत गए और सिर्फ २६ साल के थे और यह भी भारतीय जन संघ मैं ही थे लेकिन १९८० आते आते इन्होने अपने आप को भारतीय जन संघ से दूर कर लिया और कांग्रेस मैं चले गए.

और यहाँ से माधवराव सिंधिया राजनीति मैं सक्रिय हो गए कांग्रेस मैं माधवराव सिंधिया को बहुत सारे पद मिले तोह माधवराव सिंधिया का राजनितक सफर अच्छे से चलने लगा.

Early Life of Jyotiraditya Scindia

ज्योतिरादित्य सिंधिया का जन्म १ जनवरी १९७१ मैं बॉम्बे मैं हुआ था, एक बात मैं आपको बताना चाहता हु की ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ तारीखों का संयोग है, १९७१ मैं इनका जन्म हुआ था और १९७१ मैं ही इनके पिताजी माधवराव सिंधिया राजनीती से जुड़े और चुनाव भी लड़ा और जीते भी और तब वह सिर्फ २६ साल के थे, और जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जब इश्तिफा दिया १० मार्च को कांग्रेस से उसी दिन इनके पिताजी माधवराव सिंधिया का जन्मदिन भी था.

Jyotiraditya Scindia Education


ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिताजी राजनीती मैं सक्रिय हो गए थे और ज्योतिरादित्य सिंधिया पढ़ाई मैं, ज्योतिरादित्य सिंधिया की शुरूआती पढ़ाई दून स्कूल देहरादून से हुई फिर यह चले गए हार्वर्ड यूनिवर्सिटी यहाँ से इन्होने B.A की डिग्री ली और इसके बाद इन्होने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से M.B.A की डिग्री ली.

Political Career

अब २००१ मैं माधवराव सिंधिया की मौत हो जाती है विमान दुर्घटना मैं तोह अब ज्योतिरादित्य सिंधिया राजनीती मैं आ गए इनके पिताजी का चुनाव क्षेत्र था गुणा तोह यही से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने चुनाव लड़ा कांग्रेस के टिकट पर और जीत गए और तब से लेकर अब तक जीत ते ही आ रहे थे.

२००४ मैं जब कांग्रेस की सरकार आयी तोह तब इनको Minister of State for Communications and Information Technology का पद भी दिया गया, २००९ मैं जब यह फिर से गुणा से जीते तोह इनको Minister of State for Commerce भी बनाया गया. २०१४ मैं यह फिर से गुणा से जीते लेकिन २०१९ मैं हार गए.

Current Controversy

अभी जो विवाद चल रहा है उसे समझते है जब २०१८ के जो मध्य प्रदेश के चुनाव हुए, अब मध्य प्रदेश मैं २३० सीटे है ११४ कांग्रेस को मिली थी और १०९ सीटे मिली बीजेपी को बहुमत के लिए आपको चाइये ११५ सीटे, अब २०१८ से पहले मध्य प्रदेश मैं बीजेपी की सरकार थी करीबन १५ साल से बीजेपी की सरकार थी यहाँ पर लेकिन २०१८ बीजेपी हार गयी और कांग्रेस जीत गयी.

अब इस चुनाव मैं ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बहुत अच्छा और तगड़ा काम किया था और लग रहा था की इनको ही मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया जायगा, हलाकि कांग्रेस के पास दो विकल्प थे एक ज्योतिरादित्य सिंधिया और दूसरे कमलनाथ, कमलनाथ के पास काफी अनुभव था और ज्योतिरादित्य सिंधिया युवा है तोह मुख्यमंत्री बनाया गया कमलनाथ को.

२०१९ ज्योतिरादित्य सिंधिया चुनाव हार गए गुणा से वह जीत नहीं पाए, इसके बाद पश्चिम U.P का जो प्रभारी का पद था इनके पास वह छीन लिया गया, तोह धीरे धीरे ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास से सारे पद चले गए और कोई पद ही नहीं रहा इनके पास, और यही ग़ुस्से का कारन बना.

अब ज़ाहिर सी बात है की अगर कोई पद नहीं मिल रहा इतने साल काम करने के बावजूद भी तोह कोई क्योँ काम करेगा, अब कांग्रेस जो है बॉर्डर पर है क्योँकि बहुमत मिली नहीं है कांग्रेस को अगर २-४ MLA हट गए तोह कांग्रेस तोह गयी.

अब ९ मार्च २०२० के दिन ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट किया की अब मैं कांग्रेस से इश्तिफा दे रहा हु और कांग्रेस के साथ मेरा सफर यही ख़तम होता है. लेकिन १० मार्च को कांग्रेस का बयान आता है की कोई इश्तिफा नहीं दिया गया है हमने ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी से निकला है.

लेकिन कांग्रेस के लिए सब से बड़ी परेशानी की बात यह हो गयी की ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ साथ २२ और MLA ने इश्तिफा दे दिया अब २२ लोगो ने  इश्तिफा दे दिया तोह कितनी सीटे बची कांग्रेस के पास ९२, तोह अब कमलनाथ कैसे सरकार बचाएंगे.

तोह यह थी ज्योतिरादित्य सिंधिया जीवनी - Biography of Jyotiraditya Scindia in Hindi.