हेलो दोस्तों इस्लामिक शासक पर आज मेरा ७ व व्यख्यान है और फिलहाल हम पूरा गुलाम वंश के बारे मैं जान रहे है, गुलाम वंश की श्रृंखला को आगे भड़ाते हुए आज हम जानेंगे घियासुद्दीन बलबन के बारे मैं. घियासुद्दीन बलबन गुलाम वंश का सब से बड़ा सुल्तान था ऐसा हम कह सकते है क्योँकि इसने  विस्तार तोह किया ही लेकिन विस्तार के साथ अपना शासन भी जो है मजबूत करता गया.

घियासुद्दीन बलबन जीवनी - Biography of Ghiyasuddin Balban in Hindi | Hinglish Posts


यह व्याख्यान थोड़ा लम्बा है लेकिन आपको पढ़ने मैं काफी मज़ा आएगा तोह चलिए शुरू करते है घियासुद्दीन बलबन जीवनी - Biography of Ghiyasuddin Balban in Hindi.

दोस्तों इससे पहले मैं ६ व्यख्यान दे चूका हु गुलाम वंश पर उससे जाकर पहले पढ़े.

Who Was Ghiyasuddin Balban

घियासुद्दीन बलबन ९ वमा सुल्तान था गुलाम वंश का और दिल्ली सल्तनत का, १२६६ से लेकर १२८७ तक इसका शासन था. इसका जन्म कब हुआ कहा हुआ इसके बारे मैं किसी को पक्के तौर पर नहीं पता. घियासुद्दीन बलबन का जब शासन आया तोह उसने काफी सारे बदलाव लाये जानेंगे उसके बारे मैं हम, और उसकी उपलब्धियो के बारे मैं भी.

Early Life of Ghiyasuddin Balban

घियासुद्दीन बलबन का जन्म तुर्की परिवार मैं हुआ था. मंगोल ने बचपन मैं इसका अपहरण कर लिया था और फिर इसको बेच दिया था ख्वाजा जमाल उद-दिन को. बाद मैं ख्वाजा जमाल उद-दिन ने इसको बेच दिया इल्तुतमिश को.

घियासुद्दीन बलबन की ख़ास बात यह थी की बचपन से ही उसे पता था की शासन करना कैसे है यह गुणवत्ता बचपन से ही इसमें थी. इल्तुतमिश ने घियासुद्दीन बलबन को महत्वपूर्ण गुलाम दल का सदस्य बनाया था.

इस गुलाम दल को कहा जाता था तुरकन इ चहलगानी, यह दल मैं ४० मत्वपूर्ण गुलाम थे जिसमें से एक घियासुद्दीन बलबन भी था. यह दल बहुत तरीके से ख़ास था क्योँकि यह राजदरबारी भी थे जो राजा बनाते भी थे और राजा को उसकी गद्दी से हटाते भी थे.

Kingmaker

रज़िया सुल्तान की जीवनी मैं मैंने आपको बताया था की कैसे रज़िया सुल्तान जो है सुल्तान बनी, इल्तुतमिश की मौत के बाद राजदरबारियों के सहयोग से रज़िया को सुल्तान बनाया गया लेकिन बाद मैं इन्ही राजदरबारियों ने रज़िया सुल्तान के खिलाफ साज़िश रची और उन्हें गद्दी से हटा दिया गया.

रज़िया सुल्तान के बाद उसके पति को गद्दी दी गयी लेकिन उसे भी हटा दिया गया, फिर बहराम शाह को लाया गया लेकिन बाद मैं उसे भी हटा दिया गया, फिर मसूद शाह उसे भी हटा दिया गया. और यह सब कौन कर रहा था राजदरबारी मतलब तुरकन इ चहलगानी.

तुरकन इ चहलगानी उस वक़्त सब से मज़बूत दल था इसी लिए जब घियासुद्दीन बलबन सुल्तान बना उसे लगा इस तुरकन इ चहलगानी को हटाना बेहद ज़रूरी है वरना यह मेरा भी तख्ता पलट कर देंगे.

अब आगे नसीरुद्दीन महमूद को सुल्तान बनाया गया और नसीरुद्दीन महमूद जो है बलबन को नायब की पदवी दे दी थी. मतलब सुल्तान के बाद अगर किसी के पास ताक़त है तोह वह है बलबन के पास.

नसीरुद्दीन महमूद का शासन १२६६ तक चलता है और जैसे ही नसीरुद्दीन महमूद की मृत्यु होती है तुरंत ही बलबन गद्दी पर अपना कब्ज़ा जमा लेता है और ९ वमा सुल्तान बन जाता है दिल्ली सुल्तनत का.

Sultan

घियासुद्दीन बलबन सुल्तान बन तोह गया लेकिन सुल्तान बने रहने के लिए जितने भी दुश्मन है उन सब को पहले हटाना होगा, अब उस वक़्त आंतरिक विद्रोह काफी हो रहा था जैसे कभी राजपूतो ने विद्रोह कर दिया, मेवाड़, अवध, बंगाल तोह पहले इन विरोधीओ को चुप कराना बेहद ज़रूरी था और इसके लिए इसने अपनी रणनीति बनाना शुरू कर दी थी.

घियासुद्दीन बलबन के पहले मसूद शाह, बहराम शाह और नसीरुद्दीन महमूद यह तीनो शासक बेहद ही कमज़ोर थे और वह शासन करने के लायक तोह थे ही नहीं और तीनो ने मिलाकर कुछ २५ साल तक शासन किया तोह इन २५ सालो मैं शासन जो है वह बेहद कमज़ोर हो गया था.

तोह घियासुद्दीन बलबन जब सुल्तान बना तोह उसने कह दिया की हम Theory of Kingship को अपनाएंगे, इस theory से सुल्तान का पद और मज़बूत होता है और उसे शासन करने मैं आसानी होती है.

Theory of Kingship

घियासुद्दीन बलबन जैसे ही सुल्तान बना उसने अपना पद अपनी गद्दी को मज़बूत करने मैं लग गया, इसके लिए इसने Theory of Kingship Policy of Blood and Iron इसको प्रस्तुत किया.

Theory of Kingship का मतलब होता है की सिर्फ सुल्तान ही है, सुल्तान ही ईश्वर है अगर किसी ने भी विद्रोह करने की कोशिश की या फिर मेरे फैसले पर किसी ने आपत्ति जताई उसका गला वही काट दिया जायगा।

अब ऐसे सुल्तान को कहा जाता है तानाशाह। घियासुद्दीन बलबन कहता था की तानाशाही बेहद ज़रूरी है, घियासुद्दीन बलबन क्या करता था अपने प्रतिद्वंद्वी को हिंसा से और क्रूरता से उसको रास्ते से हटा देता था.

तोह घियासुद्दीन बलबन ने सब से पहले क्या किया की सुल्तान की जो ताक़त ख़तम हो गयी थी मसूद शाह, बहराम शाह और नसीरुद्दीन महमूद के समय उसे फिर से पुनर्स्थापित किया इस Theory of Kingship के तहत.

Blood and Iron 

घियासुद्दीन बलबन ने एक और चीज़ की थी Sijda और Paibos. इसका कहना था की कोई भी मेरे सामने आये सब से पहले सजदा करे फिर Paibos मतलब पैरो को चूमना मतलब पहले सजदा और बाद मैं पैरो को चूमना, यह इस लिए किया गया था ताकि सुल्तान की जो पदवी है वह ऊपर रहे.

अब Sijda और Paibos के अलावा दूसरे काफी अनुसासन लाये थे जैसे राजदरबार मैं शराब और हसी मज़ाक़ यह बिलकुल भी नहीं चलेगा, घियासुद्दीन बलबन खुद भी वैसे कम ही बोलता था और वह इस चीज़ का पालन भी करता था.

घियासुद्दीन बलबन बहुत गंभीर इंसान था और वह अपनी भावनाएँ को व्यक्त नहीं करता था जब इसके बेटे की मृत्यु हो गयी थी तब भी यह काफी शांत था जैसे कुछ हुआ ही नहीं है, बहुत ही गंभीर इंसान था.

और यह ऐसा इसलिए था क्योँकि जब यह राजदरबारी था तब इसने देखा था की राजा कैसे बदलते है, इसलिए इसने फैसला कर लिया था की मैं अपनी कमज़ोरी लोगो को नहीं बताऊंगा.

Distraction of 40

तुरकन इ चहलगानी ४० महत्वपूर्ण राजदरबारियों को मरवा दिया था घियासुद्दीन बलबन ने, अब मरवाया इसलिए था क्योँकि घियासुद्दीन बलबन को पता था की अगर मैंने इन्हे छोड़ दिया तोह कल यह मुझे हटा देंगे इसलिए इन्हे मरवा दिया.

Administration

घियासुद्दीन बलबन के पास बहुत बड़ी सेना थी और इसने सेना को पुनर्गठित कर दिया था, इल्तुतमिश के समय सेना के लोगो को ज़मीने दी जाती थी मुफ्त मैं फिर खेती करने के लिए अलग से ज़मीन दी जाती थी, घियासुद्दीन बलबन जब सुल्तान बना इसने यह सब बंध कर दिया और जो जो ज़मीने दी गयी थी सब वापस ले ली, लेकिन ज़मीन के बदले उसने उन लोगो को पेंशन देना शुरू कर दिया.

सेना को पुनर्गठित करना बेहद ज़रूरी था क्योँकि विद्रोह होता रहता था, मेवाड़ से कभी आक्रमण हो रहा है कभी अवध से हो रहा है तोह घियासुद्दीन बलबन ने अपनी पुनर्गठित सेना के सहारे इनको कुचलने मैं कामयाब रहा था.

बंगाल से भी विद्रोह हुआ था बंगाल का जो राजयपाल था तुगरिल खान अब इसने घियासुद्दीन बलबन के खिलाफ विद्रोह कर दिया और घियासुद्दीन बलबन ने ही तुगरिल खान को बंगाल का राजयपाल बनाया था.

तोह तुगरिल खान को मुहतोड़ जवाब देने के लिए घियासुद्दीन बलबन ने अपने सेनापति आमीन खान को भेजा लेकिन वह हार गया फिर अपने बेटे को भी भेजा लेकिन वह भी हार गया, आखिर कार घियासुद्दीन बलबन को खुद जाना पड़ा और तुगरिल खान हार गया और फिर घियासुद्दीन बलबन के बेटे को बंगाल का राजयपाल बनाया गया.

पश्चिमी सीमावर्ती से मंगोल का आक्रमण बहुत होता था तोह इनसे निपटने के लिए घियासुद्दीन बलबन ने दिल्ली के चारो कौनो मैं क़िले बनवा दिए थे और यहाँ पर सैनिको को बिठा दिए थे शेर खान इन किलो को देखता था प्रभारी बनाया गया था शेर खान को किलो का लेकिन शेर खान की मृत्यु हो जाती है तोह क़िले होने के बावजूद मंगोल आते और सब कुछ लूट कर चले जाते.

तोह फिर घियासुद्दीन बलबन ने क्या किया की इस पश्चिमी सीमावर्ती को दो मैं विभाजित कर दिया मुल्तान और लाहौर इस पर शासन करेगा घियासुद्दीन बलबन का बड़ा बेटा मोहम्मद और दूसरा सुमाना जिस पर शासन करेगा इसका दूसरा बेटा.

तोह दो मैं विभाजित कर दिया और यहाँ पर सेना को तैनात कर दिया और जब जब मंगोल का आक्रमण हुआ तब तब इसके दोनों बेटो ने मंगोल को हराया.

१२८६ मैं  घियासुद्दीन बलबन के बड़े बेटे मोहम्मद की मृत्यु हो जाती है जिस वजह से घियासुद्दीन बलबन को काफी दुःख हुआ लेकिन दिखाया नहीं और मोहम्मद, घियासुद्दीन बलबन का सब से अज़ीज़ बेटा था तोह इसकी मौत की वजह से इतना बड़ा झटका लगा की १२८७ मैं घियासुद्दीन बलबन की भी मृत्यु हो गयी.

और घियासुद्दीन बलबन चाहता था की मोहम्मद गद्दी पर बैठे लेकिन वह मर गया तोह अपने दूसरे बेटे से कहा की तुम संभालो गद्दी को लेकिन उसने मना कर दिया बाद मैं मोहम्मद के बेटे मतलब घियासुद्दीन बलबन के पौते को गद्दी पर बिठाया गया था.

तोह दोस्तों यह थी घियासुद्दीन बलबन जीवनी - Biography of Ghiyasuddin Balban in Hindi.