हेलो दोस्तों आज हम बात करेंगे बहुत ही प्रचिलित सुल्तान की इस सुल्तान पर एक कामयाब फिल्म भी बन चुकी है जिसका नाम है पदमावती, दोस्तों आज हम बात करेंगे खिलजी साम्रज्य के दूसरे शासक अलाउद्दीन खिलजी की. बहुत कुछ है इनके बारे मैं जान्ने के लिए और कुछ गलतफहमी भी है इनको लेकर तोह वह आज मैं दूर कर दूंगा तोह चलिए शुरू करते है अलाउद्दीन खिलजी जीवनी - Biography of Alauddin Khalji in Hindi.

दोस्तों खिलजी साम्रज्य के संस्थापक जलालुद्दीन खिलजी की जीवनी आप ज़रूर पढ़े.


अलाउद्दीन खिलजी जीवनी - Biography of Alauddin Khalji in Hindi | Hinglish Posts


Alauddin Khalji जब सुल्तान बना तोह इसने उत्तर पर तोह अपना कब्ज़ा जमा ही लिया लेकिन यह पहला ऐसा सुल्तान था जिसने दक्षिण पर भी अपना कब्ज़ा जमा लिया था.

Early Life of Alauddin Khalji

अलाउद्दीन खिलजी दोस्तों इसका जन्म कब हुआ था यह नहीं पता क्योँकि गुलाम था, अलाउद्दीन खिलजी का बचपन का नाम था अली गुरशास्प, अलाउद्दीन खिलजी के पिता का नाम था शिहाबुद्दीन मसूद दोस्तों शिहाबुद्दीन मसूद भाई था खिलजी साम्रज्य का संस्थापक जलालुद्दीन खिलजी का तोह जलालुद्दीन खिलजी, अलाउद्दीन खिलजी के चाचा था, अलाउद्दीन खिलजी के ३ और भाई थे अलमस बेग, कुतलुग तिगिं और मोहम्मद, अलाउद्दीन खिलजी तीनो भाई मैं सब से बड़ा था.

जलालुद्दीन खिलजी जब सत्ता पर बैठा तोह लोगो को लगा की यह बहुत ही निर्दयी शासक होगा लेकिन इसका उल्टा हो गया जलालुद्दीन खिलजी एकदम नरमदिल और दयालु शासक निकला और इसके इसी दयाभाव स्वभाव इसी के लोगो को पसंद नहीं आता था तोह अलाउद्दीन खिलजी ने सोच लिया था की मुझे मेरे चाचा को सत्ता से हटाना होगा.

अलाउद्दीन खिलजी धीरे धीरे योजना बनाता गया क्योँकि जलालुद्दीन खिलजी सुल्तान था उसे हटाना के लिए सेना की ताक़त और पैसा चाहिए था तब अलाउद्दीन खिलजी के पास यह दोनों ही नहीं थे तोह अलाउद्दीन खिलजी ने दक्षिण पर आक्रमण कर दिया क्योँकि वहा पैसा ज़्यादा था तोह दक्षिण पर आक्रमण कर दिया जलालुद्दीन खिलजी ने वह भी अपने सुल्तान की इज़ाज़त के बिगर.

दक्षिण मैं देवगिरि पर आक्रमण किया वहा के राजा रामचंद्र को हरा दिया और हारने के बाद रामचंद्र ने कहा मैं तुम्हे हर साल पैसा दूंगा और अभी जितना भी खज़ाना है वह भी ले जाओ मेरी जान बक्श दो, अलाउद्दीन खिलजी सारे पैसे लेकर वापस आया और जलालुद्दीन खिलजी को इसके बारे में कुछ नहीं पता था, जलालुद्दीन खिलजी, अलाउद्दीन खिलजी पर काफी ग़ुस्सा हो गया लेकिन अलाउद्दीन खिलजी पर फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की.

अब अलाउद्दीन खिलजी के मन में कुछ और चल रहा है उसने अपने भाई अलमस बेग के साथ साज़िश रची अपनी चाचा को जान से मारने की और अपने चाचा जलालुद्दीन खिलजी को मार दिया.

अलाउद्दीन खिलजी ने जब जलालुद्दीन खिलजी को मारा तोह बहुत ज़्यादा लोग दुखी नहीं थे लोग खुश थे क्योँकि जैसे मैंने कहा की बड़ा ही दयालु राजा था तोह जो भी राजदरबारी थे वह तोह चाहते ही थे के जलालुद्दीन खिलजी हठ जाए क्योँकि अगर यह सत्ता पर रहे तोह सारा शाही खज़ाना खतम हो जायगा और खिलजियों का शासन ख़तम हो जायगा.

Sultan

जलालुद्दीन खिलजी को मारकर अलाउद्दीन खिलजी सुल्तान बन गया और अलाउद्दीन खिलजी ने जलालुद्दीन खिलजी की बेटी मलिका ए जहाँ से शादी कर ली, मलिका ए जहाँ के बारे मैं कहा जाता है की यह अलाउद्दीन खिलजी पर काफी हावी थी तोह बोला जाता है की यह शादी बिलकुल भी कामयाब नहीं थी.

२१ अक्टूबर १२९६ में अलाउद्दीन खिलजी ने अपने आप को आधिकारिक तौर पर दिल्ली सल्तनत का सुल्तान घोषित कर दिया और यहाँ से इसने अपने शासन का विस्तार करना शुरू कर दिया.

बलबन का जब शासन था तोह उसने कई राज्यों को इकठ्ठा और मज़बूत कर दिया था लेकिन विस्तार जो है वह करेगा अलाउद्दीन खिलजी. अलाउद्दीन खिलजी ने सब पर आक्रमण कर दिया था किसी को भी नहीं छोड़ा.

अलाउद्दीन खिलजी दिल्ली सल्तनत का सुल्तान तोह बन गया था लेकिन इसका सफर इतना आसान नहीं होने वाला, परेसानी क्या क्या थी अलाउद्दीन खिलजी के लिए एक तोह राजदरबारियौ को अलाउद्दीन खिलजी पर भरोसा नहीं था क्योँकि धोके से राजा बना था तोह राजदरबारियौ को लगने लगा की यह तोह कभी भी धोका दे सकता है और किसी को भी मार सकता है.

दूसरी परेशानी अर्काली खान, अर्काली खान, जलालुद्दीन खिलजी का बड़ा बेटा था अर्काली खान को पंजाब और मुल्तान का शासक बनाया गया था तोह अलाउद्दीन खिलजी को लगता था की यह कही आक्रमण न कर दे.

अलाउद्दीन खिलजी के शासन मैं बहुतो ने सर उठाये लेकिन इसने सबके सर काट दिए अर्काली खान को भी मार डाला और जो परेशानिया उसे सता रही थी वह सारी परेशानियों को ख़तम कर दिया.

लेकिन अब ऐसा नहीं है की इसने कत्लेआम मचा रक्खा था नहीं जिसने भी आत्मसमर्पण किया उसको अलाउद्दीन खिलजी ने बक्श दिया और इनाम भी दिया और दूसरी बात अलाउद्दीन खिलजी के महेल मैं हिन्दू भी काम करते थे और उनके साथ अच्छे से व्यवहार किया जाता था.

Consolidation of Power

अलाउद्दीन खिलजी की नीति यही थी की जितना हो सके उतना विस्तार करके अपना राज्य फेलाओ, कहा जाता है की अलाउद्दीन खिलजी अपना खुद का धर्म स्थापित करना चाहता था और इसने अपने ४ वज़ीरो को तैनात कर दिया था और बोला था की यह ४ वज़ीर ऐसे ही साबित होंगे जैसे ४ राशिदून खलीफा तोह इसमें सच्चाई कितनी है यह पता नहीं.

अलाउद्दीन खिलजी का दूसरा लक्ष्य यह था की जितना हो सके उतना पैसा लूटो, जहा पर भी इसके सैनिक आक्रमण करते थे वहा से खूब सारे पैसे लूट लेते थे. और इसी के वजह से इसका साम्रज्य इतना बड़ा हो गया.

एक बात और मैं बताना चाहूंगा की जलालुद्दीन खिलजी के जो आदमी थे जिन्हे जलाली राजदरबारी भी कहा जाता था वह सब अलाउद्दीन खिलजी से जाकर मिल गए थे तोह तकनीकी रूप से अगर देखे तोह अलाउद्दीन खिलजी को इन्हे इनाम देना चाहिए लेकिन अलाउद्दीन खिलजी ने इन सब के सर कटवा दिए यह कह कर की इन्होने अपने सुल्तान को धोखा दिया है कल यह मुझे भी धोखा दे सकते है.

मंगोल आक्रमण बहुत होता था मंगोल बार बार आक्रमण करते थे और १२८० आते आते मंगोलो ने मध्य एशिया से लेकर यूरोप तक अपना दबदबा बना लिया था लेकिन भारत बच गया था लेकिन फिर भी बार बार अफ़ग़ानिस्तान के रास्ते पाकिस्तान के रास्ते उत्तर पश्चिम पर यह आक्रमण करते थे तोह इनसे निपटने के लिए बलबन ने क़िले बनवा दिए थे.

अब अलाउद्दीन खिलजी के समय मैं भी मंगोल बार बार आक्रमण करते थे लेकिन अलाउद्दीन खिलजी भी बार बार सबको हरा देता था और बड़ी क्रूर तरीके से वह मंगोल को मार देता था जिस वजह से अलाउद्दीन खिलजी के नाम की दहसत हो गयी थी और मंगोल ने फिर आक्रमण नहीं किया, तोह अलाउद्दीन खिलजी को यह श्रेय जाता है की उसने मंगोलो को भारत मैं आने नहीं दिया लेकिन इन्ही मंगोलो की वजह से राजस्थान मैं लड़ाई हुई यह हम आगे जानेंगे की क्योँ हुई थी.

Expansion

विस्तार की बात करे तोह उत्तर भारत मैं गुजरात और राजस्थान, राजस्थान राजपूतों की धरती बहुत सालो से राजपूतों ने राजस्थान मैं राज किया है और काफी सारे आक्रमणों को रॉक के रक्खा था. तोह उत्तर भारत मैं राजस्थान जो है यह बहुत ही अहम राज्य था हालांकि अलाउद्दीन खिलजी ने क्या किया था की राजस्थान के जो मुख्य केंद्र थे उन्हें जीत कर उनपर सीधा शासन स्थापित नहीं किया उसने हिन्दू सासको को दे दिया क्योँकि अलाउद्दीन खिलजी को पता था की मैं यहाँ शासन नहीं कर पाऊंगा क्योँकि हिन्दुओ को हिन्दू ही संभाल सकता है.

गुजरात की बात करे तोह गुजरात मैं राज था वाघेला राजा रयकरण का, तोह अलाउद्दीन खिलजी की नीति रही है की विस्तार करो, तोह उसने अपने बहुत ही कुशल सैनिक नुसरत खान और उलुघ खान को भेजा तोह जब गुजरात जा रहे थे तोह जैसलमेर बिच मैं पड़ा तोह जैसलमेर को कब्ज़े मैं कर लिया और उसके बाद गुजरात पर भी अपना कब्ज़ा कर लिया.

जो गुजरात के राजा रयकरण थे वह भाग गए देवगिरि अपनी बेटी को लेकर लेकिन रयकरण की बीवी कमलादेवी वह इनके कब्ज़े मैं आ गयी तोह अलाउद्दीन खिलजी के सामने जब कमलादेवी को लाया गया तोह अलाउद्दीन खिलजी ने इनसे शादी कर ली, तोह १२५८ आते आते गुजरात और जैसलमेर कब्ज़े मैं आ गए.

रणथम्बोर की बात करे तोह हम्मीर देव राजपूत राजा थे वहा पर और कहा जाता था की रणथम्बोर क़िला अजय था लेकिन अलाउद्दीन खिलजी ने इसे भी जीत लिया. अलाउद्दीन खिलजी क्या करता था की क़िले के बहार डेरा जमाकर बैठ जाता था और सारी सप्लाई बंध कर देता था ताकि क़िले के अंदर कुछ जा ही ना सके, क़िले में बहुत सारे लोग रह रहे है तोह जो इतने लोग रेह रहे है उनको खाने पिने के लिए तोह कुछ चाहिए ना तोह सप्लाई जब काट दी तोह ना खाना ना पानी तोह आप कैसे जी पाओगे आपको आत्मसमर्पण करना ही होगा तोह यह चीज़ राजस्थान मैं जहा जहा जीत हासिल की सबके साथ किया.

रणथम्बोर की बात करे तोह जब अलाउद्दीन खिलजी ने मंगोलो को हराया था तोह कुछ मंगोल सैनिक रणथम्बोर चले गए थे और वहा पर सरण ले ली थी तोह जब अलाउद्दीन खिलजी को पता चला तोह अलाउद्दीन खिलजी ने कहा की इन मंगोल सैनिक को हमारे हवाले कर दो लेकिन हम्मीर देव नहीं माने तोह दोनों मैं युद्ध हुआ और अलाउद्दीन खिलजी ने रणथम्बोर को जीत लिया।

अब इसके बाद चित्तोर, मेवाड़ चित्तोर का क़िला यह पावर सेंटर था और यह अभेद था अभी तक कोई इसे जीत नहीं पाया था, तोह  अलाउद्दीन खिलजी ने जब रणथम्बोर को जीता तोह आत्मविश्वास से भरपूर हो गया था तोह रणथम्बोर के बगल मैं ही था चित्तोर, सिवाना, जालोर एक एक कर के सबको जीतना शुरू कर दिया लेकिन यहाँ पर भी बड़ी दिक्कत थी जितने मैं.

तोह अलाउद्दीन खिलजी ने क्या किया की चित्तोर के अंदर तोह जा नहीं सकता था तोह क़िले के बहार डेरा डालके बैठ गया ८ महीने तक बहार बैठा और सारी सप्लाई काट दी थी तोह आखिरकार राजा रतनसिंघ को बहार आना पड़ा युद्ध होता है और चित्तोर को भी जीत लिया जाता है १३०३ मैं.

पदमावत काव्य के हिसाब से अलाउद्दीन खिलजी रानी पदमिनी की खूबसूरती पर मरमिटा था और इसी लिए यह चित्तोर चला गया था ताकि रानी पदमिनी को देख सके तोह चित्तोर तोह हार गया था तोह रानी पदमिनी के साथ जितनी और भी औरते थी सब ने जोहर कर लिया अपने आप को जला दिया.

इसके बाद सिवाना १३०८ मैं और जालोर १३१० इन्हे भी जीत लिया गया तोह जितने भी मज़बूत क़िले थे उनपर अपना कब्ज़ा कर लिया गया.

दक्षिण की बात करे तोह ४ मज़बूत राज्य थे पहला यादव राज्य देवगिरि मैं, दूसरा था काकतिया तेलंगाना का राज्य राजधानी वारंगल, तीसरा होयसला का राज्य राजधानी द्वारा समुद्रु, और फिर पंड्या राज्य राजधानी मदुरा, तोह इन चारो राज्यों को भी अलाउद्दीन खिलजी ने जीत लिया था

Death

कहा जाता है की अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु काफी कष्टदायक थी, और आखरी के दिन बिलकुल अच्छे नहीं थे और इसके पास इसकी देखभाल के लिए कोई नहीं था क्योँकि जो इसके सैनिक थे वह युद्ध मैं होते थे और लोग भी जो थे इससे दूर भाग रहे थे क्योँकि स्वभाव थोड़ा अशिष्ट हो गया था, लोग कहते है ना की लोगो का बुढ़ापे मैं दिमाग खराब हो जाता है वैसे ही अलाउद्दीन खिलजी के साथी भी हुआ.

और अलाउद्दीन खिलजी को बिमारी भी काफी हो गयी थी, मलिक काफूर यह इसका चहीता सैनिक था और बहुत गहरी दोस्ती थी दोनों के बिच तोह अलाउद्दीन खिलजी चाहता था की उसके आखिरी के दिनों मैं मलिक काफूर उसके साथ रहे लेकिन मलिक काफूर कुछ और साज़िश रचने मैं व्यस्त था.

मलिक काफूर चाह रहा था की अलाउद्दीन खिलजी जल्दी से मर जाए ताकि वह सुल्तान बन जाए, अलाउद्दीन खिलजी के साथ उसके आखरी दिनों मैं कोई नहीं था ना उसकी बीवी, ना उसके बच्चे सब के सब अलाउद्दीन खिलजी के खिलाफ षड़यंत्र रच रहे थे.

अलाउद्दीन खिलजी ने काफी कोशिश की के जो भी उसके खिलाफ साज़िश रच रहे है उन्हें मार दिया जाए लेकिन ऐसा हुआ नहीं, मलिक काफूर ने अलाउद्दीन खिलजी को मार डाला, तोह अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु जनवरी १३१६ मैं हुई.

Four Ordinances

अलाउद्दीन खिलजी के प्रशासन की बात करते है, देखिये अलाउद्दीन खिलजी बहुत ही सख्त राजा था और अगर हम अलाउद्दीन खिलजी से पहले के जो सुल्तान आये थे उन सब का तख्ता पलट हुआ था तोह अलाउद्दीन खिलजी ने इसके बारे मैं बहुत सोचा की ऐसा क्योँ हो रहा है की हर एक सुल्तान का तख्ता पलट हुआ है, अलाउद्दीन खिलजी यह बिलकुल नहीं चाहता था की उसका भी तख्ता पलट हो.

तोह इसके लिए उसने चार चीज़े सोची, सब से पहले इसने यह सोचा की इतना खतरनाक तरीके से शासन करो की आक्रमण या धोखा देने की किसी की भी हिम्मत न हो.

फिर कर भड़ा दो, कर भदायेंगे तोह लोग ज़्यादा काम करेंगे ज़्यादा काम करेंगे तोह लोगो को विद्रोह करने का मौका ही नहीं मिलेगा.

फिर हर किसी को गरीब कर दो, और खासकर के अमीरो को गरीब कर दो अमीरो से सारा पैसा छीन कर गरीबो मैं बाट दो, क्योँकि पैसा है तोह ताकत है  तोह पैसा ही छीन लो तोह अपने आप ही जो विद्रोही है बैठ जाएंगे.

चलिए इन अध्यादेशों को अच्छे से समझते है

1 - तख्ता पलट जो बार बार हो रहा था उसकी सब से बड़ी वजह यह भी थी की उस वक़्त कोई जासूस नहीं था, तोह अलाउद्दीन खिलजी को ख़याल आया की जासूसों को छोड़ दो ताकि अगर कही किसी जगह पर सुल्तान के लिए अगर गलत बात भी हो रही है तोह जासूस मुझे आकर बताएंगे और उसका सर वही पर काट दिया जायगा.

2 - अलाउद्दीन खिलजी के समय मैं बहुत लोग अमीर थे और लोगो के पास ज़मीने बहुत थी और इन ज़मीनो से लोग खूब सारा पैसा कमाते थे तोह अगर किसी के पास पैसा बहुत है तोह उसके पास ताक़त भी होगी तोह अलाउद्दीन खिलजी ने सोचा की यह सारी ज़मीने लोगो से छीन ली जाए और इन ज़मीनो को हम अपने अंतर्गत कर लेते है और फिर इनपर पर कर भड़ा दो.

3 - शराब एक बहुत बड़ा कारण था जो तख्ता पलट होते थे, लोग शराब पीकर आते थे और सबकुछ भूल जाते थे और फिर षड़यंत्र रचते थे तोह अलाउद्दीन खिलजी ने शराब को गैरकानूनी कर दिया.

4 - अंतर विवाह को बिलकुल भी अनुमति नहीं मिलेगी, क्योँकि अमीरो मैं जब अंतर विवाह होता है तोह इसी के वजह से फिर साज़िशे रची जाती है सुल्तान के खिलाफ।

Military

सेना का बात करे तोह अलाउद्दीन खिलजी की सेना ४ मैं विभाजित थी सब से पहली सेना होती थी वह थी शाही सेना यह जो सेना थी वह सुल्तान की सेना थी और बड़े बड़े आक्रमणों मैं सुल्तान के साथ जाती थी.

दूसरी थी प्रांत सेना यह राज्य्पाल के अंतर्गत थी. तीसरी सेना थी सामंती सेना जिन्हे ज़मीने दी जाती थी तोह ज़मीन के जो मालिक थे वह अपनी सेना बना लेते थे. और चौथी सेना थी युद्ध सेना.

तोह दोस्तों यह थी अलाउद्दीन खिलजी जीवनी - Biography of Alauddin Khalji in Hindi. अब अगले व्याख्यान मैं हम इसके बेटे मुबारक खिलजी इसकी बात करेंगे।