हेलो दोस्तों आज तीसरी बायोग्राफी है भारत मैं इस्लामिक शासन की, आज हम बात करेंगे क़ुत्ब उद-दिन ऐबक इनका शासन ज़्यादा लम्बा नहीं था सिर्फ ४ साल तक ही यह शासन कर पाए लेकिन एक प्रसिद्ध शासक थे, क़ुत्ब उद-दिन ऐबक गुलाम था मोहम्मद घोरी का और मोहम्मद घोरी का कोई बेटा नहीं था इस लिए मोहम्मद घोरी अपने ग़ुलामो को ही अपना बेटा मानता था और क़ुत्ब उद-दिन ऐबक, मोहम्मद घोरी का सब से चहेता गुलाम था. तोह आज बात करेंगे क़ुत्ब उद-दिन ऐबक जीवनी - Qutb al-Din Aibak Biography in Hindi.


क़ुत्ब उद-दिन ऐबक जीवनी - Qutb al-Din Aibak Biography in Hindi | Hinglish Posts



दोस्तों यह जीवनी पढ़ने से पहले आप मोहम्मद घोरी की जीवनी ज़रूर पढ़े.

क़ुत्ब उद-दिन ऐबक को लख बक्श भी बोला जाता था, क्योँकि यह लाखो रूपये दान कर देता था इस लिए इसको लख बक्श भी कहा जाता था. क़ुत्ब उद-दिन ऐबक पहले सुल्तान थे दिल्ली सल्तनत के तोह यही से शुरुआत होती है दिल्ली सल्तनत की.

Early Life of Qutb al-Din Aibak

क़ुत्ब उद-दिन ऐबक एक गुलाम था और इसके बचपन का नाम था ऐबक. यहाँ पर में आपको एक बात बता दू की इस्लामिक शासक अपने ग़ुलामो से काफी अच्छे से व्यवहार करते थे मोहम्मद घोरी, क़ुत्ब उद-दिन ऐबक को अपना बेटा मानता था और यह सोचने की बात है की ग़ुलामो के वंश का पूरा साम्रज्य भारत मैं बन गया था तोह यही से हमे पता चल जाता है की गुलामो के साथ काफी हमदर्दी और उनसे अच्छे से व्यवहार किया जाता था.

क़ुत्ब उद-दिन ऐबक एक तुर्किश परिवार से आता था, लेकिन इसको एक ग़ुलामो के तौर पर बेच दिया गया था, और इसको सब से पहले ख़रीदा पर्शिया के क़ाज़ी ने, और इसके बाद मोहम्मद घोरी ने खरीद लिया.

क़ुत्ब उद-दिन ऐबक बहुत ही अच्छा कमांडर था, और मोहम्मद घोरी के प्रति काफी निष्ठावान था और इसी से प्रभावित होकर मोहम्मद घोरी ने इसको आमिर-ई-अखुर बना दिया मतलब गुलामो का सरदार.

Qutb al-Din Aibak

मोहम्मद घोरी ने जहा जहा आक्रमण करके विस्तार किया था तब क़ुत्ब उद-दिन ऐबक, मोहम्मद घोरी के साथ था और क़ुत्ब उद-दिन ऐबक सैन्य कमांडर बन गया था.

११९२ में दूसरा तराइन का युद्ध हुआ था जिसमें पृथ्वीराज चौहान की हार हुई थी और मोहम्मद घोरी जीत गया था और मुस्लिम शासन की स्थापन कर दी थी लेकिन पूरी तहरा से नहीं, क्योँकि दूसरा तराइन के युद्ध की जीत के बाद वह अफ़ग़निस्तान वापस चला गया था.

तोह क़ुत्ब उद-दिन ऐबक ने भारत मैं विस्तार करना शुरू कर दिया था, राजपूत के खिलाफ युद्ध किये और ११९५ से लेकर १२०३ तक इसने अपने अभियान जारी रक्खे.

Invasion to India

क़ुत्ब उद-दिन ऐबक ने गुजरात पर अपना अभियान चलाया और फिर कन्नौज का जो युद्ध हुआ था जिसमें राजा जयचंद की हार हुई थी तोह इसमें क़ुत्ब उद-दिन ऐबक का बहुत बड़ा हाथ था.

बदउँ, बनारस, चंदावर, पंजाब, उत्तर प्रदेश सब कुछ जीत लिया, और फिर १२०३ मैं कालिंजर के किले को अपने कब्ज़े मैं ले लिया, जो की बहुत ही मुश्किल माना जाता था.

Became Sultan 

१२०६ में मोहम्मद घोरी की हत्या कर दी गई थी, तोह तीन सेनापति थे जिन्हे गद्दी मिल सकती थी ताजुद्दीन यल्दूज, नसीरुद्दीन क़बाचा, और क़ुत्ब उद-दिन ऐबक. यह तीनो के तीनो गुलाम थे.

लेकिन गद्दी मिलती है क़ुत्ब उद-दिन ऐबक को क्योँकि वह सब से निष्ठावान था, दूसरे दो जो उमेदवार थे गद्दी के लिए उनको भी क्षेत्र दिए गए ताजुद्दीन यल्दूज को अफ़ग़निस्तान का क्षेत्र मिला और नसीरुद्दीन क़बाचा को उच्च जो की सिंध मैं आता है वह क्षेत्र इसे दिया गया. और क़ुत्ब उद-दिन ऐबक को भारतीय प्रांत का शासक बनाया गया था.

क़ुत्ब उद-दिन ऐबक गुलाम था और इस गुलामी मैं से उसे निकलना था तभी वह सुल्तान बन सकता था इसके लिए क़ुत्ब उद-दिन ऐबक को manumission दिया गया.

manumission एक तहरा का दस्तावेज होता था जिस मैं लिखा रहता था की "तुम अब आज़ाद हो" तोह यह manumission दिया था मोहम्मद घोरी के भतीजे सुल्तान घीअसुद्दीन महमूद ने क़ुत्ब उद-दिन ऐबक को और इसके बाद ही वह सुल्तान बना और भारत मैं अपने शासन के स्थापना की और दिल्ली सल्तनत की शुरुआत हुई.

लेकिन क़ुत्ब उद-दिन ऐबक के लिए यह सफर इतना आसान नहीं होने वाला था क्योँकि भारत मैं अभी भी कई जगहों पर हिन्दू शासन था, राजपूत इसी ताक में थे की कब हमे मौका मिले और कब हम इनको यहाँ से इन्हे उखाड़ कर फेक दे. दूसरा यह भी था की क़ुत्ब उद-दिन ऐबक के जितने भी गुलाम और सेनापति थे वह भी यह ताक मैं थे की कैसे क़ुत्ब उद-दिन ऐबक का सफाया किया जाए.

लेकिन क़ुत्ब उद-दिन ऐबक मैं कूटनीति भर भर के थी  लोगो को अपनी बातो से ही प्रभावित कर देता था और सामने वाले का भरोसा जीत लेता था, इसने अपनी बेटी और बहन की शादी अपने दुश्मन से कर दी थी ताकि भरोसा जीता जा सके और सहयोग मिल सके.

१२०६ से क़ुत्ब उद-दिन ऐबक का शासन शुरू हुआ था और यह १२१० तक चला.

Qutb al-Din Aibak Works

अपने ४ साल के कार्यकाल मैं क़ुत्ब उद-दिन ऐबक ने बहुत सारे काम किये, जिसमें से अगर प्रसिद्ध काम की बात की जाए तोह अढ़ाई दिन का झोपड़ा बनवाया जो अजमेर मैं है, और क़ुत्ब मीनार बनवाना शुरू करवाया था ११९९ में लेकिन बन नहीं पाया बाद में इनके दामाद इल्तुतमिश ने इसे पूरा करवाया था .

चौगन जिसे पोलो कहा जाता है वह खेलते खेलते घोड़े से गिर गया और वही पर उसकी मौत हो गयी और १२१० में इसके शासन का भी अंत हो गया.

इसके बाद इस सिलसिले को जारी रक्खा इनके दामाद इल्तुतमिश ने और वह बना नया सुल्तान दिल्ली सल्तनत का.

तोह दोस्तों यह थी क़ुत्ब उद-दिन ऐबक जीवनी - Qutb al-Din Aibak Biography in Hindi.