हेलो दोस्तों आज में लेकर आया हु संजय गाँधी जीवनी - Biography of Sanjay Gandhi In Hindi. मैंने इंदिरा गाँधी मतलब इनकी माता की जीवनी भी लिखी है आप जाके पढ़ सकते है.

देखिए Sanjay Gandhi की बात करे तोह Emergency लगाने के पीछे दिमाग इन्ही का था ऐसा बोला जाता है , Sanjay Gandhi कभी नहीं चाहते थे के Emergency हटे. तोह बहुत कुछ है जान्ने के लिए, Sanjay Gandhi की पूरी जीवनी देखेंगे.

संजय गाँधी जीवनी - Biography of Sanjay Gandhi In Hindi | Hinglish Posts


Sanjay Gandhi Early Life 

Sanjay Gandhi का जन्म १४ दिसंबर १९४६ को दिल्ली में हुआ था. यह इंदिरा गाँधी और फ़िरोज़ गाँधी के बेटे थे, इंदिरा गाँधी के दो बेटे थे बड़े बेटे राजीव गाँधी और छोटे बेटे संजय गाँधी.

Sanjay Gandhi और Rajiv Gandhi में बहुत बड़ा फर्क बताया जाता है, हालही में एक रिपोर्ट आयी थी उस में लिखा हुआ था का "हो सकता है की Sanjay Gandhi को लोग इतना तवज्जो न दे लेकिन जो काम यह कर के गए वह कमाल का था"

Sanjay Gandhi  के स्वभाव की बात करे तोह यह थोड़े मूफट थे, बोलने से पहले यह सोचते नहीं थे, और अब अगर हम Rajiv Gandhi की बात करे तोह यह बिलकुल विपरीत थे Sanjay Gandhi से एकदम शांत थे और लोगो की बात सुनते थे.

Sanjay Gandhi की शुरूआती पढ़ाई Doon School से हुई है यह देहरादून में स्तिथ है, इसके बाद यह इंग्लैंड चले गए पढ़ाई के लिए, Sanjay Gandhi ने Automotive Engineering का कोर्स किया, यह कोर्स ३ साल का था. और Rolls Royce के साथ शागिर्दी भी की. एक बात में आपको बता दू की Sanjay Gandhi के पास कोई यूनिवर्सिटी से डिग्री नहीं है.

Maruti Suzuki Plant


कांग्रेस के जो पुराने नेता थे उनसे Sanjay Gandhi की बिलकुल बनती नहीं थी, Sanjay Gandhi का कहना था की युवा नेताओ को सामने लाये जाए उन्हें मौका दिया जाए.

इंग्लैंड से वापस आकर Sanjay Gandhi ने कहा की हम एक ऐसे कार बनाते है जो हर एक इंसान उसे खरीद सके और चला सके, उस कार का नाम था Maruti Suzuki.

अब जब Indira Gandhi ने यह आईडिया सुना तोह Indira Gandhi ने अपनी सारी ताक़त इस में लगा दी, और उस वक़्त आपको हर चीज़ का licence लेना पड़ता था, अगर आपको धूपबत्ती का भी बिज़नेस करना है तोह आपको सरकार से अनुमति लेनी पड़ती थी, और बहुत लम्बी प्रक्रिया रहती थी.

लेकिन Indira Gandhi ने यह सारी प्रक्रिया झट से करवा दी, अब यह आईडिया P. N. Haksar को पता चल जाता है, P. N. Haksar कांग्रेस के नेता होते है और Indira Gandhi के करीबी होते है और Sanjay Gandhi  साथ इनकी बिलकुल भी नहीं बनती थी.

तोह P. N. Haksar ने Sanjay Gandhi से यह कहा की कार की जगह स्कूटर लाओ क्योँकि कार कोई खरीद नहीं पायेगा ७० से ८०% जनता तोह गरीब है तोह कार कहा से खरीदेंगे, लेकिन Sanjay Gandhi ने इनकी बात नहीं मानी और Indira Gandhi ने Sanjay Gandhi की बात मान ली.

यह जो फैसला था कार के कारखाने लगाने का यह बुरी तहरा से असफल रहा क्योँकि Sanjay Gandhi कोई अनुभव भी नहीं था इस चीज़ का.

Emergency 

अब Gandhi परिवार की बात हो रही है और Emergency की बात ना हो ऐसा नहीं हो सकता, १९७५ में  Indira Gandhi की सत्ता खतरे में थी, भरस्टाचार बहुत था फिर Maruti Suzuki की आईडिया असफल होना, फिर Rajnaryan ने Indira Gandhi पर इलज़ाम लगा दिए की इन्होने चुनाव में धांदली की है.

लेकिन Sanjay Gandhi की इन सब मैं क्या भूमिका थी?, Sanjay Gandhi का मानना था की किसी भी हिसाब से गद्दी ना जाने पाए, Sanjay Gandhi, Indira Gandhi को सलाह देते थे प्रधानमंत्री के घर से फैसले होते थे Emergency के वक़्त प्रधानमंत्री कार्यालय से नहीं, मतलब सारे फैसलों में Sanjay Gandhi का हाथ होता ही था.

Justice Sinha अल्ल्हाबाद हाई कोर्ट के जज ने जब Indira Gandhi के खिलाफ फैसला सुनाया तोह इन्हे ६ साल के लिए निलंबित कर दिया गया, फिर बाद में यह हुआ की Indira Gandhi प्रधानमन्त्री रह सकती है लेकिन चुनाव में भाग नहीं ले सकती, Sanjay Gandhi ने साफ़ साफ़ Indira Gandhi से कह दिया था की आपको आपको गद्दी नहीं छोड़नी.

आंदोलन भी कई चल रहे थे इस वक़्त J.P आंदोलन चल रहा था, और गुजरात में तोह हिंसा तक हो गयी और फिर कांग्रेस की गद्दी चली गयी, देखिए Indira Gandhi की साफ़ सोच थी की जो हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है मुझे उसे मान लेना चाहिए और इश्तफा दे देना चाहिए क्योँकि दिक्कत बहुत ज़्यादा हो गयी थी. लेकिन Sanjay Gandhi यह बिलकुल नहीं चाहते थे और इस सब के बाद Emergency लग गयी.

२५ जून १९७५ में जब Emergency लगी तोह Sanjay Gandhi के पास बहुत ताक़त आ गयी, Emergency में ताक़त और मजबूत हो जाती है, और जो भी फैसले इस दौरान लिए गए थे वह सब Sanjay Gandhi ने ही लिए थे.

Indira Gandhi ने अपना 20 Point economic programme घोषित किया, इस प्रोगाम में यह था की जो साक्षरता है उसे बढ़ाओ, लोगो को शिक्षित करो, भरस्टाचार हटाओ, जातिवाद हटाओ, दहेज़ नहीं होना चाहिए, हरियाली लाओ और परिवार नियोजन सब से भयंकर सब की पकड़ पकड़ कर नशबंदी की गयी.

परिवार नियोजन देखिए यह अच्छी बात है लेकिन यह किसी का निजी मामला है इस में किसी भी तहरा की ज़बरदस्ती नहीं होनी चाहिए, लेकिन ज़बरदस्ती की जा रही थी क्योँकि भारत Emergency के वक़्त लोकतांत्रिक देश नहीं था, तोह यह जो भी फैसले लिए Sanjay Gandhi ने इसका खामयाज़ा भुगतना पड़ा Sanjay Gandhi को.

फिर प्रेस सेंसरशिप भी लगा दी थी, मतलब प्रेस को किसी भी तहरा की अनुमति नहीं थी की आप Emergency और Indira Gandhi खिलाफ कुछ भी बोले, फिर जितने राजनेता थे कोई भी अगर Emergency के खिलाफ बोल रहा है तोह उससे सीधा जेल में डालो.

१९७७ में जब Emergency हटाई गयी फिर १९८० में चुनाव हुए तोह पहली बार कोई गैर कांग्रेसी सरकार बनी और जनता पार्टी सत्ता में आयी, लेकिन अमेठी से Sanjay Gandhi चुन कर आये.

अब इसी दौरान Sanjay Gandhi की शादी भी होती है Menka Gandhi से, और Menka Gandhi को Indira Gandhi बिलकुल पसंद नहीं करती थी Sonia Gandhi को पसंद करती थी.

Later 

तोह हमने देखा की Emergency हटाई जाती है और जनता पार्टी सत्ता में आती है और जो Charan Singh थे गृहमंत्री उन्होंने Indira Gandhi और Sanjay Gandhi पर कई सारे आरोप लगा दिए, और कुछ अजीब आरोप भी लगा दिए थे इस में एक आरोप तोह मुर्ग़ी चुराने का भी था.

१९७९ में Morarji Desai की जगह Chaudri Charan Singh को प्रधानमंत्री बनाया गया, कांग्रेस ने यहाँ पर साथ दिया लेकिन एक शर्त पर के हम पर जो भी आरोप है वह सब हटने चाहिए लेकिन यह शर्त मानी नहीं गयी तोह कांग्रेस ने साथ पीछे खींच लिया और सरकार गिर गयी.

१९८० में फिर से चुनाव होते है और Indira Gandhi फिर जीत गयी, लेकिन इसी साल एक और चीज़ हुई की Sanjay Gandhi राजनीति में बहुत तेज़ी से उभर रहे थे, कांग्रेस पार्टी का प्रभारी भी Sanjay Gandhi को बना दिया गया था.

और भविष्य में वह बहुत अच्छे अच्छे योजनाए लाने वाले थे लेकिन ऐसा हो नहीं पाया क्योँकि विमान दुर्घटना हो जाती है और उसी विमान में Sanjay Gandhi भी थे तोह २३ जून १९८० को Sanjay Gandhi की विमान दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है.

इसके पीछे कहानी यह थी की Sanjay Gandhi कार बहुत तेज़ चालते थे  और इन्हे विमान उड़ाना भी आता था तोह जब वह विमान उड़ाते थे तोह वह हवा में विमान के साथ कलाबाज़ी करते थे, तोह दिल्ली फ्लाइंग क्लब में गए और विमान उड़ाया उन्होंने और कलाबाज़ी भी विमान ने खायी, लेकिन अचानक Sanjay Gandhi का नियंत्रण छूट गया विमान से और वह सीधा निचे गिर गया और फिर पता चला की इनकी मृत्यु हो गयी है.

तोह दोस्तों यह थी संजय गाँधी जीवनी - Biography of Sanjay Gandhi In Hindi, आशा करता हु आपको पसंद आयी होगी।