हेलो दोस्तों आज में आपके लिए लेकर आया हु अन्ना हजारे जीवनी - Biography of Anna Hazare in Hindi. में भी अन्ना तू भी अन्ना अब तोह सारा देश है अन्ना, दोस्तों ऐसे ही कुछ नारे गूंज उठे थे २०११ में, जी हां २०११ में जो आंदोलन हुआ था India against corruption इस आंदोलन में पूरा भारत इनके साथ था तोह इस आंदोलन के हीरो थे येह.

अन्ना हजारे जीवनी - Biography of Anna Hazare in Hindi | Hinglish Posts


Anna Hazare Early Life 

सब से पहले में आपको एक बात बता दू Anna Hazare इनका असली नाम नहीं है, इनका असली नाम है Kisan Baburao Hazare इनका जन्म या तोह १५ जून १९३७ में या फिर १५ जनवरी १९४० में हुआ था भिंगार अहमदनगर में.

लेकिन इनका पूरा जीवन अगर देखे तोह रालेगण सिद्धि में बिता है, रालेगण सिद्धि बहुत गरीब गाँव था लेकिन Anna Hazare ने इस गाँव को गरीब से निकाला और ऊपर ले गए, रालेगण सिद्धि, पुणे से ८७ किलोमीटर दूर है.

इनके पिताजी का नाम था Baburao Hazare और इनकी माताजी का नाम था Laxmi Bai, काफी गरीब घर में जन्म हुआ था, इसी गरीबी की वजह से Anna Hazare ठीक से पढ़ भी नहीं पाये.

लेकिन इनके रिश्तेदारों ने कहा की हम Anna Hazare को पढ़ाएंगे, तोह इस लिए Anna Hazare को मुंबई आना पड़ा, लेकिन पैसा तोह रिश्तेदारों के पास भी नहीं था, तोह इस वजह से वह ७ वी कक्शा तक पढ़े.

तोह इनके रिश्तेदारों ने इन्हे ७ वी कक्शा तक पढ़ाया, इसके बाद इनको कह दिया की अब हमारे पास पैसा नहीं है, तुम्हारे पास है तोह तुम आगे पढ़ो, तोह Anna Hazare को ना चाहते हुए पढ़ाई छोड़नी पड़ी, और पैसे कमाने के लिए दादर रेलवे स्टेशन पर फूल बेचना शुरू कर दिया.

Join Army 

लेकिन  Anna Hazare के अंदर जज़्बा था की उन्हें देश के लिए कुछ करना है, इसी लिए येह Indian Army में भर्ती हो गए १९६० में ट्रक ड्राइवर का पद इन्हे मिला था, तोह ट्रक चलाते थे, १९६५ का जो युद्ध हुआ था उस में Anna Hazare मरते मरते बचे थे.

१९६५ में भारत का पाकिस्तान से युद्ध हुआ, अब Anna Hazare खुद बताते है इस घटना के बारे मैं, "की जब में जा रहा था मोर्चे पर मेरे साथ सिपाही थे, तोह अचानक से ट्रक पर बोम्ब आके गिरा हर कोई सहीद हो गया सिर्फ में बच गया", देखिये अगर हम इनका पूरा जीवन देखे तोह किस्मत का साथ इन्हे कई बार मिला है.

अब आगे येह होता है की एक तोह इनके साथ इनकी गरीबी थी, दूसरा युद्ध से इनको जूझना है, तोह यह सब फिक्र इन्हे सतानी लगी, और इस वजह से Anna Hazare डिप्रेशन में चले गए. तोह इन सब से निपटने के लिए इन्होने पढ़ना शुरू कर दिया, इन्होने Swami Vivekananda और Mahatma Gandhi इनकी किताबे पढ़ना शुरू कर दी, तोह यहाँ से एक बदलाव उन मैं आया.

१५ साल तक यह Army में रहे, अब इन १५ सालो में नागालैंड में पोस्ट हुए, तोह नागालैंड में भी यह एक बार मरते मरते बचे थे, और जैसे मैंने पहले कहा की इनकी किस्मत बहुत अच्छी है तोह किस्मत होने की वजह से सब मर गए सिर्फ यह बच गए.

Rising of Anna Hazare

१९७५ में इन्होने Army छोड़ दी, और वहा से इनका असली करियर शुरू हुआ, तोह अपने गाँव आ गए १९७५ में रालेगण सिद्धि, लेकिन जब वह अपने गाँव जाते है तोह वह पूरा बदला हुआ नज़ारा देखते है, एक ऐसा गाँव जहा पर गरीबी थी, निराशा थी, भुख्मरी थी, गरीबी पहले भी थी लेकिन जब Anna Hazare गाँव वापस आते है तोह गरीबी भड़ चुकी थी.

और सब से बड़ी दिक्कत यह हो गयी थी , की लोगो को शराब की लत लगा दी गयी थी, तोह लोग नशा करने लग गए थे, जिसकी वजह से बहुत ज़्यादा हिंसा होती थी, और हर इंसान जुआ खेल रहा था, तोह जो गाँव था वह बर्बाद हो चूका था.

जब Anna Hazare ने येह देखा तोह वह भौचक्के रह गए, और Anna Hazare सब कुछ अपने हाथो में लिया और बदलाव लाना शुरू कर दिया, तोह Anna Hazare ने सब से पहले Army की नौकरी से जो भी पैसे मिले थे वह सारे पैसे उन्होंने गाँव में लगा दिए.

और गाँव में एक मंदिर है तोह वहा पर यह लोगो को भाषण देना शुरू कर दिया और लोगो को उत्साहित करना शुरू कर दिया, और छोटे छोटे संगठन इन्होने बनाये, Swami Vivekananda ने अपनी किताब में लिखा था की युवाओ की भूमिका का क्या है, तोह सारे युवाओ को साथ लेकर आये और एक तरुण मंडल नाम का संगठन बनाया.

और जब युवाओ की ऊर्जा Anna Hazare के साथ मिल गयी तोह कमाल हो गया, धीरे धीरे गाँव में बदलाव आना शुरू हो गया, सब से पहले उन्होंने दारू को बंद किया, और धीमे धीमे ज़िन्दगी जो है पटरी पर आना शुरू हो गयी.

और Anna Hazare ने महाराष्ट्र सरकार से कहा की आप दारू को बंद ही कर दो, लेकिन सरकार ने मना कर दिया, लेकिन बाद में सिगरेट, बीड़ी सब को बंद किया गया.

पढ़ाई के लिए Anna Hazare ने बहुत कुछ किया, इन्होने अलग अलग समूह बनाये, ताकि पढ़ाई लोग आराम से बिना कोई दिक्कत से कर सके.

Reforms 

अब इन सब के बाद इन्होने Grain Bank को स्थापित किया, देखिये खेती एक बहुत बड़ी दिक्कत थी वहा पे, पानी की बहुत ज़्यादा दिक्कत थी, तोह सब से पहले तोह इन्होने एक प्रॉपर वाटर सिस्टम बनाया, अब इस सिस्टम को बनाने के लिए इन्होने Watershed Embankment बनाया, की जो भी पानी आएगा उसको इकट्ठा करेंगे और उसको सिचाई के लिए इश्तेमाल करेंगे, तोह इस काम में गाँव वालो ने साथ भी दिया.

और ऐसे फसलों को उगाएंगे जिस में पानी की ज़्यादा ज़रुरत नहीं है, तोह गन्ना उससे नहीं उघाना, चावल को नहीं उघाना इन की जगह हम, दाल को उगाएंगे, तिलहन को उगाएंगे इन सब में पानी कम लगता है.

इसके बाद इन्होने ग्रामसभा बना डाली, ग्रामसभा की बात करे तोह दोस्तों यह Mahatma Gandhiji का सपना था, Gandhiji ने कहा था की अगर देश का भला करना है तोह सब से पहले गाँवों को प्राथमिकता दो. तोह ग्रामसभा का गठन हुआ.

Anna Hazare ने एक और चीज़ की इन्होने दलितों की शादी करवाना शुरू कर दिया, गाँव में जातिवाद को पूरी तहरा से ख़तम कर दिया, अब यह कमाल की बात थी.

तोह हमने देखा की अगर एक भी इंसान अपना काम ईमानदारी से करने लगे तोह इससे समाज को कितना फायदा हो सकता है. अब जैसे अपने गाँव को सही किया अब यह भारत को सही करेंगे.

Activism 

१९९० से लेकर २०१० तक इन्होने बहुत सारे आंदोलन किये, लेकिन आंदोलन इन्होने सिर्फ महाराष्ट्र में चलाये थे, यहाँ पर इन्होने १९९१ में भ्रष्टाचार विरोधी जान आंदोलन शुरू किया, फिर जंगलो में पेड़ो को काटा जा रहा था तोह इसके लिए आंदोलन किया और इसके वजह से इन्हे जेल भी भेजा गया था गलत इलज़ाम लगा कर.

तोह २००६ तक इन्होने बहुत सारी चीज़े की, और २००० में इन्होने महाराष्ट्र सरकार से मांग की के हमे Right to Information दो, और २००५ में जो Right to Information Act आया जिस में Arvind Kejriwal भी शामिल थे, तोह कहा जाता है की जो Right to Information Act आया वह Anna Hazaare की वजह से आया.

जहा पर भी इन्हे भ्रष्टाचार दीखता था यह आंदोलन चला देते थे, और इनका सब से बड़ा हथ्यार था सत्याग्रह, २००९ में महाराष्ट्र सरकार ने एक पालिसी निकाली थी Grain Based  को लेकर, क्योँ की यह इंडस्ट्री के लिए बहुत ज़्यादा ज़रूरी है  तोह हम क्या करेंगे की food grain से दारु बनाएंगे, इसके खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया Anna Hazaare ने.

शिरडी में इन्होने अनशन शुरू कर दिया इसके खिलाफ, तोह सरकार पहले तोह मान गयी,  उसके बाद क्या हुआ की ३६ licences दे दिए गए पॉलिटिशियन या उनके बेटे को ताकि आप दारु बना सको , तोह Anna Hazaare और ग़ुस्सा हुए लेकिन अंत में सरकार को झुकना ही पड़ा.

Lokpal Bill

लेकिन मुख्य मुद्दा इनका था लोकपाल आंदोलन २०११ में, आम लोगो को बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ता है, कई बार आप अपनी दिक्कतों को लेकर किसी के पास जाते है तोह वह सरकारी कर्मचारी सुनता नहीं है, कई बार ऐसा पुलिस भी ऐसा करती है तोह इन सब के खिलाफ एक सख्त कानून आना चाइए, लोकपाल आना चाइये.

इस आंदोलन को India Against Corruption बोला गया, लेकिन यह आंदोलन इतना ख़ास क्योँ हुआ? इतना बड़ा आंदोलन भारत में यह दूसरी बार हुआ था, एक तोह J.P. आंदोलन और दूसरा यह, इसकी ख़ास बात यह थी की भारत के जितने भी बड़े बड़े नेता थे उनको एक मंच पर ले आया था यह आंदोलन, हर कोई साथ में आ गया था, Kiran Bedi, Arvind Kejriwal और सारे बॉलीवुड सेलेब्रटीज़ भी साथ में आ गये थे.

देश में अलग अलग जगाओ पर आंदोलन कर रहे थे वह सब एक जगह आ गए थे, और इसका श्रेय अरविन्द केजरीवाल को जायगा, Arvind Kejriwal, Anna Hazare को लेकर आये, पूरी योजना Arvind Kejriwal की थी लेकिन उसको निष्पादित कर रहे थे Anna Hazare.

तोह येह भारत में एक बहुत बड़ा आंदोलन शुरू हो गया, लोकपाल बिल की एक अर्से से मांग हो रही थी इसका आंदोलन शुरू हो गया, और Anna Hazare ने धमकी दे दी थी जंतर मंतर से की मेरा अनशन तब तक चलेगा जब तक मैं मर ना जाऊ अगर लोकपाल बिल पास नहीं होता है तोह.

५ अप्रैल २०११ को यह आंदोलन शुरू हुआ, देखते ही देखते पूरे देश ने इस आंदोलन में हिस्सा लिया, और सरकार को यहाँ झुकना ही पड़ा, सरकार ने एक समिति बनायीं, जिस में ५ राजनैतिक नेता थे और ५ जो थे वह गैर राजनीतिक नेता था जिस में से एक Arvind Kejriwal थे.

तोह समिति बनायी गयी, लेकिन दिक्कत यह थी की जब लोकपाल बिल को प्रारूप किया गया, तोह उस बिल में तोह बहुत से खामियों थी, बिल में यह था की बड़े बड़े नौकरशाहों को और प्रधानमंत्री को अलग रक्खा जायगा, तोह Arvind Kejriwal को येह अच्छा नहीं लगा.

दरअसल Arvind Kejriwal की जो समिति थी वोह कह रही थी की कांग्रेस हमे काम नहीं करने दे रही, और हमारी मांगो को पूरा नहीं कर रही, और कांग्रेस कह रही थी की Arvind Kejriwal हर एक बात को लेकर आंदोलन शुरू करना चाहते है.

तोह खिचड़ी कुछ ऐसी पकी की की जो बिल आया वोह सही नहीं आया, इसके बाद कुछ नहीं हुआ लेकिन अगस्त में फिर से आंदोलन शुरू हो गया.

दुबारा Anna Hazare अनशन पर बैठ गए, और फिर से Anna Hazare ने धमकी दे दी की मैं तोह या मरूंगा या फिर करूँगा, सड़को पर Anna Hazare की रैली निकलने लगी, इस आंदोलन ने पूरे भारत को बदल कर रख दिया, और कांग्रेस की सरकार जाने का सब से बड़ा कारण यह आंदोलन ही था.

बहुत सारी पोलिटिकल दल आये Anna Hazare को अपनी और करने के लिए, लेकिन Anna Hazare ने सीधा कह दिया की में नाही कांग्रेस के साथ हु नाही ही बीजेपी के साथ, तोह वापस अनशन किया और फिर से सरकार झुकी, दुबारा समिति बिठाई गयी और दुबारा कुछ नहीं हुआ, और इसके बाद अरविन्द केजरीवाल और अन्ना हज़ारे दोनों अलग हो गए.

दोनों अलग इस लिए हुए क्योँकि Anna Hazare का बोलना था की कुछ भी हो जाए राजनीति में नहीं आना है, क्योँ नहीं आना है? राजनीति में अगर आप आये तोह सब से पहले तोह आपको मदद लेनी होगी, चुनाव जो लड़े जाते है तोह पैसे से लड़े जाते है, और एक बार अगर आपने किसी से पैसे लिए तोह वह आपको अपने हिसाब से चलाएगा, तोह Anna Hazare ने ठान ली थी की हम तोह नहीं आएंगे राजनीति मैं.

 Arvind Kejriwal को बार बार उत्तेजित किया जा रहा था की, अगर तुम्हे सिस्टम से इतनी ही दिक्कत है तोह तुम खुद राजनीति में आकर इस सिस्टम को बदल डालो, तोह Arvind Kejriwal ने अपनी खुद की पार्टी बना ली आम आदमी पार्टी, तोह इस वजह से Anna Hazare और Arvind Kejriwal दोनों अलग हो गए.

लेकिन बाद मैं क्या हुआ जितना तेज़ी से यह आंदोलन ऊपर गया था उतनी ही तेज़ी से निचे आ गया, इस आंदोलन के बारे में बाद में किसी ने बात भी नहीं की, Anna Hazare कही खो से गए, काफी आलोचना हुई Anna Hazare की.

एक एक कर के सब ने Anna Hazare का साथ छोर दिया, इस समय Anna Hazare छोटे छोटे आंदोलन चला रहे है, और अभी भी अपने गाँव में काफी एक्टिव है.

तोह दोस्तों यह थी अन्ना हजारे जीवनी - Biography of Anna Hazare in Hindi, आशा करता हु आपको येह पसंद आयी होगी।